महाछवि राजें कोटि भानु लिखि लाजैं रूप - श्री चंद्र लाल गोस्वामी जी, वृंदावन प्रकाश माला
निज धाम श्री वृंदावन में दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण एक दूसरे के अंक में विराज रहे हैं, जिनकी महाछवि की कांति कोटि-कोटि सूर्यों की आभा को भी तुच्छ कर रही है।
श्री वृंदावन प्रकाश माला श्री चंद्र लाल गोस्वामी द्वारा रचित ग्रंथ है जो श्री राधा वल्लभ संप्रदाय के रसिक एवं श्री वनचंद्र जी की कन्या श्री किशोरी जी के वंश में थे।
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निज धाम श्री वृंदावन में दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण एक दूसरे के अंक में विराज रहे हैं, जिनकी महाछवि की कांति कोटि-कोटि सूर्यों की आभा को भी तुच्छ कर रही है।
श्री वृन्दावन धाम की उपमा स्वयं श्री वृन्दावन ही है, इसकी तुलना किसी और से करना असंभव है। यह अत्यधिक मधुर और दिव्य है, इसलिए मैं इस पवित्र धाम का वंदन करता हूँ।
जहां श्यामा-श्याम का नित्य निवास है, ऐसे श्री वृंदावन धाम में ही नित्य वास करते हुए, हृदय में नित्य हुलास रखते हुए श्री श्यामा-श्याम का भजन कर, उनको नित्य प्रसन्न करने की आशा को हृदय में धारण करूँगा।