3 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. युगल नाम सौं नेम, जपत नित कुंजबिहारी - श्री नाभादास, भक्तमाल (91)

    स्वामी श्री हरिदास जी का वर्णन करते हुए श्री नाभादास जी कहते हैं कि श्री स्वामी हरिदास जी का अटल नियम था कि युगल नाम के चिंतन में सदा रहते थे एवं श्यामा कुंजबिहारी को नित्य ही प्रेम से लाड़ लड़ाते थे । वे नित्य श्री राधा कृष्ण की परम अंतरंग केली का ही सदा अवलोकन करते थे, एवं श्री राधा की सखी भाव के रस का पान करते थे।

  2. जब श्री राधा रानी रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी के लिए मीठे चावल लेकर आती है

    एक दिन श्री रूप गोस्वामी सनातन गोस्वामी के लिए कुछ मीठे चावल बनाना चाहते थे परन्तु उनकी कुटिया में मीठे चावल बनाने के लिए आवश्यक वस्तुऐं नहीं था ।