राग मारू

मारु देवहिंदोलक की पत्नी हैं। वह अपने पति की प्रिय हैं। वह शांत, विवेकपूर्ण, पवित्र, दयनीय चेहरे के साथ करुणाजनक हैं। उनका कमर और पेट पतला है। राग मारू परिणामों की परवाह किए बिना सच्चाई को व्यक्त करने और जोर देने के लिए एक आंतरिक शक्ति बनाता है। मारू की प्रकृति उस निर्भीकता और शक्ति को व्यक्त करती है जो सत्य बोलती है, चाहे कुछ भी परिणाम हो।

4 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. श्यामा प्यारी जय जय श्रीराधा - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (14)

    श्यामा प्यारी श्री राधा की जय हो जो करुणा की सागर हैं, समस्त गुणों का भण्डार हैं, एवं जिनका रूप अत्यंत सुंदर एवं अगाध है ।

  2. जब चितई कजरारे नैननि - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (45)

    जब प्रिया ने अंजन-रञ्जित नेत्रों से प्रियतम की ओर दृष्टिपात किया, तो मनमोहन लाल प्रेम-विवश तो हुए ही वरन उनको चारो ओर से प्रेम रूपी कामदेवों ने घेर लिया ।