सोई रसिकअनन्य कहावै - श्री रूपरसिक देवाचार्य
वही वास्तविक रसिक अनन्य कहलाता है जिसके श्रवणेंद्रिय को युगल (श्री राधा कृष्ण) की रस लीलाओं के अतिरिक्त और कुछ भी सुनना अच्छा नहीं लगता।
मारु देवहिंदोलक की पत्नी हैं। वह अपने पति की प्रिय हैं। वह शांत, विवेकपूर्ण, पवित्र, दयनीय चेहरे के साथ करुणाजनक हैं। उनका कमर और पेट पतला है। राग मारू परिणामों की परवाह किए बिना सच्चाई को व्यक्त करने और जोर देने के लिए एक आंतरिक शक्ति बनाता है। मारू की प्रकृति उस निर्भीकता और शक्ति को व्यक्त करती है जो सत्य बोलती है, चाहे कुछ भी परिणाम हो।
4 संकीर्तन उपलब्ध हैं
वही वास्तविक रसिक अनन्य कहलाता है जिसके श्रवणेंद्रिय को युगल (श्री राधा कृष्ण) की रस लीलाओं के अतिरिक्त और कुछ भी सुनना अच्छा नहीं लगता।
श्रीकृष्ण जन्म के कारण ब्रज मण्डल में अतिशय कोलाहल हो रहा है । सभी ग्वाले आनन्द मग्न होकर परस्पर ताली बजाते हुए नाच रहे हैं।
श्यामा प्यारी श्री राधा की जय हो जो करुणा की सागर हैं, समस्त गुणों का भण्डार हैं, एवं जिनका रूप अत्यंत सुंदर एवं अगाध है ।
जब प्रिया ने अंजन-रञ्जित नेत्रों से प्रियतम की ओर दृष्टिपात किया, तो मनमोहन लाल प्रेम-विवश तो हुए ही वरन उनको चारो ओर से प्रेम रूपी कामदेवों ने घेर लिया ।