श्री ललिता मंगल

श्री ललिता मंगल श्री वंशी अलि जी द्वारा रचित ग्रंथ है जिसमें उन्होंने अपनी गुरु श्री ललिता सखी का मंगल महिमा गान किया है ।

5 लेख उपलब्ध हैं

  1. आनंदनिधि तुम ही श्रीराधा - श्री वंशी अलि, श्री ललिता मंगल (5)

    आनंद की निधि श्री ललिता सखी श्री राधा का ही अभिन्न स्वरूप हैं जिन्होंने अपनी ही [राधा की ही] भक्ति करने के लिए दो रूप धारण किए हैं (अर्थात् श्री राधा ने स्वयं की ही सहचरी भाव से भक्ति करने के लिए अपना ललिता रूप बनाया है)।