महल वर्णन (श्री लाल बलबीर)

महल वर्णन श्री लाल बलबीर ने अपने ग्रंथ ब्रज विनोद में लिखा है जिनमें श्री प्रिया प्रियतम के निज महल का अद्भुत वर्णन किया गया है ।

5 लेख उपलब्ध हैं

  1. वह रस सिंधु अगाध है, मो मति अति लघु मीन - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, महल वर्णन (11)

    श्री प्रिया प्रियतम के महल का रस अगाध सिंधु के समान है, और मेरी बुद्धि उस समुद्र की एक छोटी मछली के समान है । जो मैंने अनन्य रसिकों के मुख से सुना है, वही लिख दिया है ।

  2. श्रीवन निकुंजन में प्रीतम के संग प्यारी - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, महल वर्णन (4)

    हे प्यारी जू [श्री राधा]! कब आप मुझ दीन पर कृपा करके श्री वृंदावन के निकुंजों में, प्रियतम के संग अपना दर्शन दिखलाओगी ।

  3. परम दयाल दूजी आपसी न दीसै और

    हे श्री राधा, आप परम दयालु हैं एवं आपके जैसा मुझे कोई और दिखाई नहीं देता । हे सिरमौर, मैं आपके चरण कमलों में बारंबार प्रणाम करता हूँ ।

  4. परम दयाल दूजी आपसी न दीसै और - श्री लाल बलबीर जी, ब्रज बिनोद, महल वर्णन (8)

    हे श्री राधा, आप परम दयालु हैं और आपके जैसा मुझे कोई और दिखाई नहीं देता। हे सिरमौर, मैं आपके चरण कमलों में बारम्बार प्रणाम करता हूँ।

  5. श्री राधे नंदलाल की - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, महल वर्णन (14)

    श्री राधा-नन्दलाल की चरण-धूलि [अर्थात् वृन्दावन निज-महल की रज] को अपने सिर पर धारण करने से समस्त कार्य सिद्ध होते हैं और सभी पापों का नाश हो जाता है।