राज करै ब्रजमण्डल कौ, वृषभानु सुता बनिकें ठकुरानी
नित्य निकुंजेश्वरी श्री किशोरी जु, वृषभानु जी की पुत्री स्वरूप से समस्त ब्रजमंडल में राज कर रही हैं अत: वे ही ब्रज की ठकुरानी हैं ।
श्री नन्दन जी वृंदावन के एक रसिक कवि।
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नित्य निकुंजेश्वरी श्री किशोरी जु, वृषभानु जी की पुत्री स्वरूप से समस्त ब्रजमंडल में राज कर रही हैं अत: वे ही ब्रज की ठकुरानी हैं ।
श्री राधा श्री कृष्ण संग रास विलास करती हैं, तो निकुंज की श्रृंगार प्रतीत होती हैं । जब श्री राधा माननी स्वरूप धारण कर श्री कृष्ण से मान करती हैं तब श्री कृष्ण जिनकी चाटुकारिता करती हैं वही श्री राधे हैं ।
समस्त सृष्टि की महान शक्ति एवं तीनों लोकों की मूल आधार एक मात्र श्री राधे ही हैं ।
यह ब्रज धाम संतो की साधना भूमि है एवं भक्तों को आनंद प्रदान करने वाली है। सिद्ध महात्माओं को यह सिद्धि प्रदान करने वाली है एवं प्रेमि रसिकों को प्रेम रस प्रदान करने वाली है।
भगवान विष्णु ब्रज में गाय चरा रहे हैं, जिसे देखकर परम ज्ञानी ब्रह्मा जी भ्रमित हो गए हैं, और उनका सारा ज्ञान लुप्त हो चुका है। यहाँ भगवान शिव सखी स्वरूप में नृत्य कर रहे हैं और देवराज इंद्र तथा उनके पुत्र कुबेर, गोपी स्वरूप में पानी भरने की सेवा कर रहे हैं।
श्री राधा का नाम उच्चारण करने मात्र से संसार के समस्त कष्ट मिट जाते हैं और कलिकाल के प्रचंड प्रभाव के तेज नष्ट हो जातें हैं।