फुटकर पद [श्री ललित किशोरी]
फुटकर पद विविध पद के पदों का मिश्रण है । फुटकर पद अभिलाष माधुरी का एक भाग है ।
रचयिता: श्री ललित किशोरी
5 लेख उपलब्ध हैं
ठकुराई प्यारी लई सिवकाई पी वांट - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (69)
वृन्दावन की अनुपम प्रेम-लीला में श्री राधा ने ठकुराई (स्वामित्व) ले ली और श्री कृष्ण ने सेवकाई स्वीकार कर ली। दोनों ने अपने मन को, अपना सर्वस्व, एक-दूसरे में समर्पित कर दिया, इस प्रकार से कि दोनों के मन एक हो गए। हे सखी! प्रेम की रीति का यही सच्चा सार है।
जो कोउ वृंदावन रस चाखै - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (71)
जो बड़भागी जन श्री वृंदावन का रस चख लेता है उसे चौदह भवन एवं तीनों लोकों का सुख सपने में भी नहीं सुहाता ।
नन्द को लाल गोपाल माल उर - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (49)
श्री कृष्ण, जो महाराज नन्द के पुत्र हैं, जो फूलों की माला से सुशोभित हैं, हमेशा श्री राधा की छाया भ्रमर की भांति मंडराते रहते हैं।
ललित किशोरी इत् उत् राधे - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (६०)
जहाँ जहाँ मेरी नज़र पड़ती है वहाँ केवल और केवल प्रिया जी श्री राधारानी ही दिखती हैं।
नैनन राधे बैनन राधे सैनन राधे कृतानित राधे - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, फुटकर पद (६०)
श्री राधा मेरी आंखों में हैं, श्री राधा मेरी बोलनी में हैं, श्री राधा मेरे इशारों में हैं और केवल श्री राधा ही मेरी करनी में है। श्री राधा मेरे कानों में हैं, श्री राधा मेरे गायन में हैं, श्री राधा मेरी चेतना में हैं, केवल श्री राधा ही मेरा हित हैं - श्री ललित किशोरी|