सच्चिन्तनीयमनुमृग्यमभीष्टदोहं - जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्तोत्र (9)
ब्रह्मादि देवों द्वारा अन्वेषण किये जाने वाले अथवा विविध साधना दारा अन्वेषण करने योग्य, अभिमत फल को देने वाले संसार के समस्त तापों के शमन अर्थात नाश करने वाले परमोत्तम परम रमणीय सम्यक् प्रकार से ध्यान करने योग्य भगवान् श्रीश्यामसुन्दर के चरण-कमलों को मन, वाणी तथा प्रणय पूर्वक शरीर से सेवन करता हूँ ।
