सरस विहार रस के पद

सरस विहार रस के पद ग्रंथ श्री सरस देव जी की वाणी में श्री सरस देव जू द्वारा लिखित रस के पदों का संकलन है।

5 लेख उपलब्ध हैं

  1. श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना - श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (10)

    श्री बाँके बिहारी जी महाराज, नित्य विहारिणी श्री प्यारी जू [श्री राधा] के खिलौने के समान हैं जिनके अंगों से विविध प्रकार के रति रंग-रस उत्पन्न होते हैं जो मन को अति मोहने वाले एवं लावण्य युक्त हैं ।

  2. जुग मुख छबि बरनी न परै री - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (16)

    श्री प्रियालाल के मुखारविन्दों की रूप-माधुरी कहते नहीं बनती । परस्पर प्रेम-भरी बातों से इनके दिव्य श्रीअंगों में अनंग का संचार हो रहा है । नयनों ही नयनों में जब ये मुस्कुराते हैं, तब तो सुध-बुध भूलकर एक-दूसरे के हाथों बिक जाते हैं ।

  3. झूलत दोऊ नवल हिंडोलैं - श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (22)

    श्रीप्रियालाल यमुना-पुलिनस्थ कमल-कुञ्ज में एक नये ही प्रकार के झूले में झूल रहे हैं और दोनों एक-दूसरे को प्रेम-प्रफुल्लित विलोचनों से निहार रहे हैं ।

  4. जुग मुख छवि बरनी - श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (16)

    श्रीप्रियालाल के मुखारविन्दों की रूप-माधुरी कहते नहीं बनती । परस्पर प्रेम भरी बातों से इनके दिव्य श्रीअगों में प्रेम रूपी अनंग का संचार हो रहा है। नयनों ही नयनों में जब ये मुस्कुराते हैं, तब तो सुध-बुध भूलकर ये एक-दूसरे के हाथों बिक जाते हैं ।

  5. आजु अति राजति नागरी नाहु - श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (5)

    श्यामाकुंज बिहारी की आज की छवि बड़ी ही मोहक है। दोनों परस्पर गलबहियां दिये वृन्दावन की कुन्ज कुन्ज में भ्रमण करते डोल रहे है।