धनि धनि लाड़िली के चरन - श्री प्रियाशरण जी
श्री राधा के चरण धन्य-धन्य हैं। जो पुष्प जैसे अति सुकमाल हैं एवं स्वर्ण की आभा का हरण कर रहे हैं। श्री कृष्ण ने अपने कर-कमलों से इन चरणों में जावक एवं चित्र की रचना की है।
श्री प्रियाशरण जी, वृंदावन के रसिक संत
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श्री राधा के चरण धन्य-धन्य हैं। जो पुष्प जैसे अति सुकमाल हैं एवं स्वर्ण की आभा का हरण कर रहे हैं। श्री कृष्ण ने अपने कर-कमलों से इन चरणों में जावक एवं चित्र की रचना की है।
हे श्री राधा, आपके चरण कमल पुष्प के समान कोमल हैं और माखन की भाँति चिकने हैं, जिनके कृपामयी दर्शन से ही हृदय में प्रेम की वर्षा होने लगती है।
हे दया की निधान, गुणों की खान, रस की खान श्री राधे! कृपा करके मुझ पर अपनी रस भरी दृष्टि डालिए।
हे किशोरी जी, मुझे तो केवल एक आपका ही भरोसा है। हे किशोरी जी! तुम्हारे बिना तो मेरा अपना कोई भी नहीं है, पूरे जग में मानो अंधेरा ही पड़ा हो।