चल मन वृन्दावन चल रहिये - श्री श्यामदास
हे मन, चल वृन्दावन में ही रहें, जहाँ की रज श्री श्यामाश्याम के चरण-रज से मिश्रित परम पुनीत है, जिसे अपने माथे पर लगाकर हम अपने जन्म-जन्मान्तरों के फल को प्राप्त करें।
श्री श्यामदास गौड़ीय संप्रदाय के वृंदावन के एक रसिक भक्त हैं ।
5 लेख उपलब्ध हैं
हे मन, चल वृन्दावन में ही रहें, जहाँ की रज श्री श्यामाश्याम के चरण-रज से मिश्रित परम पुनीत है, जिसे अपने माथे पर लगाकर हम अपने जन्म-जन्मान्तरों के फल को प्राप्त करें।
हे स्वामिनी श्री राधा, मैं आपके चरणकमलों की वंदना करता हूँ। आपके चरणारविंद अरुणवर्ण के, सुकोमल, निर्मल और करुणापूरित हैं, जो कामदेव के मन को भी लुभाने वाले हैं।
अरे मन, तू वृंदावन में ही नित्य वास कर । वृन्दावन की रज को शीष पर चढ़ाने से कोटि जन्मों के पाप मिट जाते हैं ।
अरी सखी, प्यारे श्यामसुन्दर रंग में भरकर राधा प्यारी संग बैठे हैं जिसकी अनुपम छवि का वर्णन करने में मेरी वाणी असमर्थ है।
एक बार "राधे" कहने से कोटि-कोटि पाप नष्ट हो जाते हैं। वे जीव धन्य हैं जो "राधे राधे" का नित्य ही रटन लगाते हैं।