श्रृंगार रस के पद [श्री नागरी देव]

श्री राधा कृष्ण के श्रृंगार रस को समर्पित पदों का संकलन श्री नागरी देव जी द्वारा लिखित 'श्री नागरी देव जी की वाणी' नामक ग्रंथ का भाग है।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. विहरत विपिन भरत रंग ढुरकी - श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (48)

    श्रीवृंदावन में नित्यविहार-परायण लाड़िली (श्री राधा) प्रसन्न होकर लाल (श्री कृष्ण) पर प्रेम-रंग की वर्षा कर रही हैं। हर्ष से भरकर उन्होंने कुसुम-पराग रुपी गुलाल हाथों में भरकर आकाश में उड़ा दिया है।

  2. बिहारिनि लाडिली सुख रासि - श्री नागरी देव जी, श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रिंगार रस के पद (34)

    हमारी लाड़िली नित्य विहारिनी [श्री राधा] सुख की राशि हैं । जिनका स्वरूप अति अद्बुत एवं अनूप है, मन को मोहने वाली एवं जिनकी छबीली मृदु हास [मुस्कान] है ।

  3. फूलन सौं सोहत अति स्यामा सुकुमारी - श्री नागरीदेव जी

    आनन्दोल्लास से भरी-पूरी श्रीश्यामा-सुकुमारी पुष्प-शृङ्गार (प्रफुल्लता) से सज-सँभलकर आज बहुत अच्छी लग रही हैं। फूलों (प्रफुल्लताओं) की साड़ी-चोली और फूलों (प्रफुल्लताओं) के ही सारे आभूषण उन्होंने अपने श्री अंगों में धारण कर रखे हैं । रसिक शिरोमणि श्री बाँके बिहारी भी उन्हें पुष्पों ( प्रफुल्लता) से ही लाड़ लड़ा रहे हैं ।