विहरत विपिन भरत रंग ढुरकी - श्री नागरी देव जू की वाणी, श्रृंगार रस के पद (48)
श्रीवृंदावन में नित्यविहार-परायण लाड़िली (श्री राधा) प्रसन्न होकर लाल (श्री कृष्ण) पर प्रेम-रंग की वर्षा कर रही हैं। हर्ष से भरकर उन्होंने कुसुम-पराग रुपी गुलाल हाथों में भरकर आकाश में उड़ा दिया है।
