श्यामा जू की विनय पत्रिका [निकुंज केली माधुरी]

'श्यामा जू की विनय पत्रिका' निकुंज केली माधुरी का बीसवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें श्री श्यामा जू के प्रति विनय एवं प्रार्थना का वर्णन किया गया है।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. श्यामा प्यारी यह आज्ञा मैं पाऊँ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (6)

    हे परम करुणा निधान, नित्य किशोरी, श्री श्यामा प्यारी जू(श्री राधा)! कृपा कर मुझे यह आज्ञा दीजिए कि मैं सदैव अपने मन को आपके चरण कमलों में ही रखूँ ।

  2. तुम बिन कासौं विनय कहौं - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (2)

    हे श्री राधे, आपके अतिरिक्त मैं किससे विनती करूँ? हे श्यामा प्यारी, मेरी विनती सुनिये या फिर मुझे बता दीजिए कि मैं कब तक तुम्हारे विरह ताप को सहन करता रहूँ ।

  3. मोहि श्यामा प्यारी कब अपनावौगी - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (3)

    हे श्यामा प्यारी [श्री राधे], मुझे तुम कब अपना बना लोगी? मुझे तो अनन्य भाव से केवल तुम्हारे चरणों का ही एक बल है, अत: मेरे ह्रदय को कब शीतल करोगी ?

  4. श्यामा प्यारी विनय सुनौ एक मेरी - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (1)

    हे श्यामा प्यारी, मेरी एक विनय सुन लीजिये । मैं बरसाना में स्थित आपके निज वन गह्वर वन में बहुत ही भटक रही हूँ, परन्तु आपको मिल नहीं पा रहा। कृपा कर अब मुझे अपनी दासी जान अपनी चरण शरण में लीजिये ।