स्वामिनि तोर सुहाग मनाऊँ - श्री श्यामा सखी
हे स्वामिनी (श्री राधे)! मैं सदा आपके सुहाग (दाम्पत्य रस) का उत्सव मनाती रहूँ। जन्म-जन्मांतर में, हे श्री वृषभानु नंदिनी! मुझे आपकी निष्काम सेवा प्राप्त हो। जब-जब भी मैं इस जग में आऊँ, आपकी ही सेवा करती रहूँ।
