श्यामा सखी (सनम साहब)

श्यामा सखी (सनम साहब) का जन्म एक मुस्लिम परिवार में 1883 में अलवर, राजस्थान में हुआ था। इनका नाम मोहम्मद याकूब रखा गया। ये शुक संप्रदाय में श्री सरस माधुरी शरण जी के शिष्य हुए और नित्य श्री श्यामा-श्याम का भजन करते थे।

4 लेख उपलब्ध हैं

  1. स्वामिनि तोर सुहाग मनाऊँ - श्री श्यामा सखी

    हे स्वामिनी (श्री राधे)! मैं सदा आपके सुहाग (दाम्पत्य रस) का उत्सव मनाती रहूँ। जन्म-जन्मांतर में, हे श्री वृषभानु नंदिनी! मुझे आपकी निष्काम सेवा प्राप्त हो। जब-जब भी मैं इस जग में आऊँ, आपकी ही सेवा करती रहूँ।

  2. कजरारी तेरी आँखों में क्या - श्री श्यामा सखी

    एक सखी कहती है कि श्यामसुंदर की कजरारी आँखों में कोई अद्भुत टोना भरा हुआ है। जब वे उन आँखों से तुम्हारी ओर देख कर मुस्कुरा दें, तो प्राणों से हाथ धोना पड़ जाए।

  3. अनूपम माधुरी जोड़ी हमारे श्याम-श्यामा की - श्यामा सखी (सनम साहब)

    श्री श्यामा सखी कह रही हैं "हमारे श्यामाश्याम की जोड़ी बहुत सुंदर एवं मधुर है जिनके नेत्र सदा प्रेम रस से भरे रहते हैं, इस छवि की कोई उपमा नहीं है।"