राग भूपाली

भूपाली शुद्ध सत्वाद्या क्षीरोद वसना घना। प्रातः काल सदा सेव्या रागज्ञान विशारदैः॥ - देवर्षि नारद, राग निरूपणम् (52) भूपाली गांधार की पत्नी हैं। वह प्रधान है, स्वाभाविक रूप से शुद्ध राग हैं जो दूध से सफेद मोटे कपड़े धारण करती हैं। रागों में निपुण विद्वानों के अनुसार राग भूपाली को सुबह के समय प्रस्तुत करना चाहिए। राग भूपाली शांति रस को प्रकट करता है, जो वातावरण को शांत और स्थिर बनाता है।

5 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. राधे अलबेली सरकार - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (115)

    श्री राधारानी अलबेली सरकार हैं — वे सम्पूर्ण वृन्दावन की अधिष्ठात्री महारानी हैं, रसिकों की जीवन-प्राण हैं, परम उदार एवं अत्यन्त सुकुमार हैं।

  2. श्री बन उज्जवल रस की खान - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (139)

    श्री धाम वृंदावन उज्जवल रस की ख़ान है । यहाँ चारों ओर केवल “श्री राधे” की सुंदर ध्वनि ही सुनायी देती है तथा यमुना जी का जल पीने को प्राप्त है ।

  3. नाँचत मोहन संग राधिका - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (640)

    श्री राधिका सखी समूह को लिए मनमोहन श्री कृष्ण के संग नृत्य कर रही हैं । युगल जोरि श्री श्यामाश्याम प्रेम से भरकर एक-दूसरे को गलबाँही दिए हुए हैं ।

  4. रट री मुरली मेरी राधे राधे - चाचा वृन्दावन दास जी

    श्री कृष्ण कहते हैं कि "हे मेरी मुरली, तू "राधे राधे" का जाप कर । यह दिव्य नाम ही मेरी साधना है, इसीकी मैं आराधना करता हूँ । यह राधा नाम रस की सींवा है, जिसके गुण एवं रूप का सौंदर्य अगाध है ।"

  5. तन अवही कौ कामै आयो - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) व्यास वाणी, पूर्वार्ध (125)

    श्री हरिराम व्यास (श्री विशाखा सखी अवतार ) के शब्दों में, मेरा तन जो आज काम आया है धन्य है। धन्य है जो इसने साधु चरणों का संग किया जिसके परिणाम स्वरुप श्री हरि का नाम बिना प्रयास के ले सका।