राग षट

राग षट आसावरी थाट के अंतर्गत आता है। यह राग सबसे जटिल रागों में से एक है जो 6 अलग-अलग रागों का मिश्रण है। राग षट सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच गाया जाता है।

6 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. सुभग गोरी के गोरे पाँइ - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (80)

    गौरवर्ण वाली श्री राधिका के गोरे चरणारविंद की शोभा अत्यंत सुंदर है, जिन्हें स्वयं श्यामसुंदर प्रेम-विवशता से अपने करकमलों में धारण करते हैं और अपने कंठ से लगाते हैं।

  2. बाँसुरी बाजत मदन मोहन जू की - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी

    एक गोपी अपनी सखी से कहती है: हे सखी मैं क्या करूँ, श्री मदन मोहन जू की यमुना तट पर वंशी वादन का श्रवण कर मेरी सुध बुध ही खो जाती है ।

  3. स्यामा स्याम वलैया लैहौं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, उत्तरार्ध (453)

    श्री हरिराम व्यास कह रहे हैं की स्वयं को न्यौछावर करते हुए श्री वृन्दावन धाम का वास करुँगा। परम पवित्र श्रीयमुना जी में स्नान करुँगा और ब्रजवासीयों की जूठन को प्रशाद रूप में ग्रहण करुँगा। बंसीवट के परम रमणिक भूमी में भ्रमण करुँगा और लताओं के सुन्दर कुंजों का त्याग कर कहीं और नहीं जाउँगा। जब भी श्री राधा मान लीला करेंगी तो मैं उन्हें बड़े प्रेम पूर्वक मनाउँगा।

  4. " मनुवां शीख हमारी है" - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४६)

    अरे मनुष्यों हमारी सीख है कि तन मन को पूर्ण रूप से ब्रज रज में समर्पित कर दो यही इसकी शोभा है | अरे तू क्यों बेहोश होकर माँ, बाप, बेटा, स्त्री, पति इत्यादि में मन का समर्पण करके इस दुर्लभ वृन्दावन रस से वंचित है | श्री ललित किशोरी जी कहते हैं की अब भी समय है मान जा, और श्री बिहारीजी महाराज की शरण में आजा क्यूंकि आखिर उन्होंने ही तेरा साथ देना है |