नमोऽस्तु भूमन्युवयोः पदाब्जे सदैव वृन्दावन मध्य वास - गर्गसंहिता, वृन्दावनखण्डः (2.25.30)
श्री सदाशिव ने कहा — हे वृन्दावन-मध्य में सदैव वास करने वाले प्रभु (श्री राधा-कृष्ण)! आप दोनों के युगल चरण-कमलों में हमारा कोटि-कोटि प्रणाम है। हमें आपके श्री-चरणों के अतिरिक्त अब कुछ भी रुचिकर नहीं लगता। हम आपके नित्य धाम श्री वृन्दावन को छोड़कर एक पल के लिए भी कहीं अन्यत्र रहना नहीं चाहते। हे श्री हरि! हे श्री राधिका! आप दोनों को हमारा बारंबार प्रणाम है।
