जय श्रीराधावल्लभलाल श्रीवृन्दावन - 'मगन अली' (श्री वासुदेवजी)
श्री राधावल्लभ लाल की जय हो, जो श्री वृन्दावन में यमुना जी के तट पर सर्वदा निवास करते हैं।
श्री मगन अलि, श्री राधा वल्लभ संप्रदाय के एक रसिक भक्त
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श्री राधावल्लभ लाल की जय हो, जो श्री वृन्दावन में यमुना जी के तट पर सर्वदा निवास करते हैं।
श्री वृन्दावन धाम सम्पूर्ण रूप से हितमय (प्रेम से ओतप्रोत) है। श्यामा-श्याम एवं उनकी लीलाएँ भी हितमय हैं। ललिता आदि सखियाँ भी प्रेम से परिपूर्ण हैं, और सुंदर कुंज-निकुंजें भी उसी प्रेम से सराबोर हैं।
हे श्री हित हरिवंश महाप्रभु! मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपा कर मुझे दीन जानकर प्रिया-प्रियतम के निज महल की टहल (सेवा) प्रदान करें, और ऐसा वर दीजिए कि मैं सदा श्री वृंदावन में वास कर सकूँ।
आज श्री राधा पीले वस्त्रों में और श्यामसुंदर नीले वस्त्रों में सुशोभित हैं । दोनों की इस अद्भुत छवि को देखकर मगन अलि मुग्ध हो रहे हैं ।