नमो नमस्तेऽस्तु परात्परायै - श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (1)
मैं बारंबार उनको प्रणाम करता हूँ, जो सर्वोपरि हैं, जिनके परे कुछ नहीं है, जिनका नाम राधा है और जो सम्पूर्ण सृष्टि की पालक हैं। जो कोई एक बार भी उनका नाम स्मरण करता है, वह अवश्य ही संसार-बंधन से मुक्त होकर उनके परम धाम को प्राप्त करता है।
