श्री राधा स्तोत्र [श्री वंशी अलि]
श्री राधा स्तोत्र श्री वंशी अलि जी द्वारा लिखित श्री राधा महिमा को समर्पित स्तोत्र हैं ।
7 लेख उपलब्ध हैं
नमो नमस्तेऽस्तु परात्परायै - श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (1)
मैं बारंबार उनको प्रणाम करता हूँ, जो सर्वोपरि हैं, जिनके परे कुछ नहीं है, जिनका नाम राधा है और जो सम्पूर्ण सृष्टि की पालक हैं। जो कोई एक बार भी उनका नाम स्मरण करता है, वह अवश्य ही संसार-बंधन से मुक्त होकर उनके परम धाम को प्राप्त करता है।
आदौत्वमेवासि तथावसाने - श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (2)
हे श्री राधा! जगत की सृष्टि के आदि में तुम ही थीं, मध्य में तीन प्रकार से - विष्णु, ब्रह्मा और रुद्र बनकर सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार आदि तीन प्रकार से संचालन करती हो और प्रलय के उपरांत भी तुम्हीं शेष रहती हो ।
नानावतारस्तव देवि मायया - श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (15)
श्री राधा की दैविक माया से ही नाना प्रकार के अवतार होते हैं और नंद का पुत्र उनकी चरणों की रज से उत्पन्न हुआ है । लालित्य की सीमा, श्री ललिता की चरण कृपा से प्राप्त होने वाली श्री राधा जीवों पर पुत्रवत स्नेह करने वाली हैं ।
विशोकजे, भानुसुते, किशोरिके, राधे - श्री वंशी अली, श्री राधा स्तोत्र (17)
श्री राधा जो विशोकजा तथा श्री वृषभानु की पुत्री हैं, वह अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं एवं उनप र स्नेह की वर्षा करती हैं । श्री राधा ही मेरी एक मात्र गति हैं । श्री राधा ऐसी कृपा करें कि उनके श्री चरणों में ही मेरी अनन्य मति बनी रहे ।
विफलीकृतचंद्रमण्डले राधे पाद - श्री वंशी अली, श्री राधा स्तोत्र (28)
जिनकी पद नख चंद्रिका ने चंद्र मंडल को निस्तेज कर दिया है, ऐसे श्री राधा के चरणों में करुण क्रंदन युक्त होकर मैं श्री वृंदाविपिन के आमोद और रस के आश्रय की याचना करता हूँ ।
निरस्तसाम्येन च साम्य कल्पनात्वदीय - श्री वंशी अली, श्री राधा स्तोत्र (14)
श्री राधा की तुलना किसी से करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है [चाहे कोई कितना ही महान क्यूँ न हो] क्यूँकि श्री राधा तो ‘निरस्तसाम्य’ [समता रहित] हैं ।
शाखोपरिष्ठा इह चन्द्रलेखा, भवेद्यथोक्तिः परमल्पदृष्टेः - श्री वंशी अलि, श्री राधा स्तोत्र (8)
जैसे किसी अत्यंत अल्प दृष्टि वाले व्यक्ति को यह कहकर कि “देखो उस वृक्ष की शाखा के ऊपर चंद्रमा दिखाई दे रहा है, संकेत से चंद्रमा का बोध कराते हैं” । उसी प्रकार “श्री कृष्ण के भी जो परे तत्व हैं वहीं राधा हैं" वह बतलाया जाता है।