शेष महेश दिनेश गणेश लौं - श्री प्रेम जी
शेष, शिव, सूर्य, गणेश तथा स्वयं वेद भी विचार करते-करते उस परम तत्त्व की पूर्ण सीमा नहीं पा सके।
श्री प्रेम जी वृंदावन के हरिदासी संप्रदाय के एक रसिक भक्त हैं दल
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शेष, शिव, सूर्य, गणेश तथा स्वयं वेद भी विचार करते-करते उस परम तत्त्व की पूर्ण सीमा नहीं पा सके।
जिनका मुख कमल मधुर से भी अधिक मधुर, अमृत से भी अधिक सुस्वादु है, जो रूप, रंग और माधुर्य से पूर्ण है।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव, ब्रजेश्वर श्री कृष्ण और देवी लक्ष्मी जैसे परम अधिकारी भी श्री कुंजबिहारी कुंजबिहारिणी जू की महिमा का पूर्णतः पार नहीं पा सकते।
श्री स्वामी हरिदास जी की कृपा से मैं प्रिया प्रियतम की नित्य विहार की झांकी को निहार रहा हूँ।
मैं तन्त्र, मन्त्र, यन्त्र अथवा अन्य कोई साधना नहीं जानता, मैं तो एकमात्र श्री बाँके बिहारी जी को ही जानता हूँ एवं उन्हीं के चरणों की शरण में रहता हूँ।