श्री स्वामिनीजी प्रार्थना

श्री स्वामिनी प्रार्थना श्री राधारानी के चरण कमलों में एक सुंदर प्रार्थना है जिसे श्री विट्ठल नाथजी द्वारा छह श्लोकों से संजोया गया है।

6 लेख उपलब्ध हैं

  1. अस्तंगच्छत्सूर्या शुशुक्षणौ - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (4)

    हे श्री राधे,ऐसा मेरा सौभाग्य कब होगा कि मेरा दिन भर का दुःख अस्त होते हुए सूर्य के हवन कुंड अग्नि में भस्म हो जाये तथा आपको प्रिय लगने वाले प्रियतम की प्रेम वार्ता को आपको सुनाने से मेरा ब्रह्म यज्ञ पूर्ण हो जाए।

  2. त्रिषणमिह भवदंघ्रिप्रणतिः - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (3)

    हे श्री राधे, मेरा त्रिकाल स्नान मात्र आपके चरणों में प्रणाम करने से पूर्ण हो तथा क्लेशों के निवारण के लिए जप स्तुति में मात्र अति प्रेम भाव पूर्वक आपके नाम का उच्चारण हो।

  3. भूयान्मेऽभ्यव्हारस्तावक ताम्बूल चर्वित नैव - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (2)

    हे श्री राधे, मेरा यह सौभाग्य कब होगा, की इस भूमंडल में मेरा पोषाहार केवल आपके चर्वित ताम्बूल पर आधारित होगा, तथा आपकी करुणा दृष्टि कटाक्ष एवं मंद मुस्कान ही मेरे उत्कण्ठित ह्रदय को शीतल करेंगे।

  4. श्री राधे ! प्रियतम द्रक् सङ्गम - श्री विट्ठलनाथ जी, श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (1)

    हे श्री राधे, क्या सदैव मेरी आँखें प्रियतम और आपकी आँखों के संगम के दर्शन से होने वाले अद्भुत प्रेम आनंद से अश्रु पूरित होंगी, न की जल से?

  5. भवतीनां प्रियसङ्गम संजात - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (5)

    हे राधे, ऐसा कब होगा जब आपको अपने प्रियतम श्याम सुंदर से मिलने पर जो अपार आनंद प्राप्त होता है जिसमें प्रत्येक क्षण नित्य नव रस उत्सव होता है, उसको देखकर मेरी समस्त इंद्रियाँ तृप्त हो जाएँगी ।

  6. इत्थं जीवन मस्तु क्षणमपि - श्री विट्ठलनाथ जी (गुसाईं जी), श्री स्वामीनीजी प्रार्थना (6)

    हे राधे, मैं ऐसी कामना करता हूँ कि मैं तत्काल प्राण त्याग दूँ यदि मैं एक क्षण के लिए भी आपसे दूर हो जाऊँ और मैं नित्य केवल और केवल आपकी ही शरण ग्रहण करूँ।