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  1. श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी

    माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।

  2. लाल की रूप माधुरी नैननि निरखि नेकु सखी - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित स्फुट वाणी (22)

    हे सखी, तू अपने नेत्रों से लाल की रूप माधुरी को तनिक देख तो सही । सुकुमारता की राशि श्रीश्यामसुन्दर की मुसकान कामदेव के मन को हरण करने वाली है । उनके नख से शिखा पर्यन्त विभिन्न अंग इतने अधिक सुन्दर हैं मानो उन्होंने उमँगकर सुन्दरता की सीमा का उल्लंघन कर दिया है ।

  3. सरद सुहाई जामिनि, भामिनि रास रच्यौ - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (234)

    शरद कि सुहावनी रात्रि में भामिनी श्री राधा ने रास रचा है । यमुना तट पर वंशीवट के निकट प्रवाहमान शीतल-मंद-सुगंधित पवन सुखमय है ।

  4. वन विहरन चले दोऊ प्यारे - श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (65)

    श्री श्यामा श्याम वन-विहार करने चले हैं । दोनों नृत्य एवं गान करते हुए सखियों के ह्रदय में प्रेम बढ़ा रहे हैं, दोनों रूप की राशि हैं एवं तीनों लोकों के अंधकार को मिटानेवाले हैं ।