राग अडानो

राग अडानो (अडाना) असावरी थाट से संबंधित है। इस राग के गायन से शुद्ध प्रेम और कामना का वातावरण प्रकट होता है। राग अडानो देर रात 12 बजे से 3 बजे के बीच गाया जाता है।

6 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. भजौ मन राधे महारानी - श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)

    हे मन! श्री राधा महारानी जू का अनन्य भाव से भजन करो। जिनके रसपूर्ण यश को मनमोहन श्री कृष्ण भी उन्मत्त होकर गान करते हैं एवं जो सबको सुख प्रदान करने वाली हैं।

  2. तेरी भौंह की मरौरन तें - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (72)

    हे प्यारी राधिके, तुम्हारी चढ़ी हुई भौंह को देखकर ही श्री लाल जी (श्री कृष्ण) त्रिभंगी मुद्रा में आ जाते हैं और अंजन छुवाने के कारण श्याम कहलाते हैं।

  3. वंशीवट के निकट हरि रास रच्यौ - श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, उत्तरार्ध (255)

    वंशीवट के निकट श्री हरि ने मोर मुकुट एवं पीले वस्त्रों को धारण कर रास रचाया। पुनः श्री यमुना जी के सुंदर तट पर, वृंदावन की सघन कुंजों में युगल वर श्री प्रियतम प्यारी आलस में भर उनींदे हो जाते हैं । श्री हरिराम व्यास इस अद्भुत छवि को निहार कर अति संतुष्टता एवं प्रसन्नता में भर कर श्री राधा कृष्ण पर बलिहार जा रहे हैं।

  4. ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना - श्री सूरदास, सूर सागर

    श्याम सुंदर यमुना किनारे विराज रहे हैं। जब से वह मेरी दृष्टि में आए हैं, तब से एक क्षण को भी मुझे धीरज नहीं मिल रहा है एवं उनसे मिलने को व्याकुलता बढ़ती ही जा रही है । [1]