किशोरी दे वृन्दावन वास - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (102)
हे किशोरी जी (श्री राधा)! मुझे वृंदावन का सदा वास प्रदान कीजिए! मेरी यही आशा है कि रसिक संतों के चरणों में मेरी प्रीति सदा बनी रहे ।
राग दरबारी आसावरी थाट से संबंधित है। यह राग वातावरण में एक गंभीर, भारी और ध्यानपूर्ण स्थिति उत्पन्न करता है। राग दरबारी मध्य रात्रि के तीसरे प्रहर में 12 बजे से 3 बजे के मध्य गाया जाता है।
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हे किशोरी जी (श्री राधा)! मुझे वृंदावन का सदा वास प्रदान कीजिए! मेरी यही आशा है कि रसिक संतों के चरणों में मेरी प्रीति सदा बनी रहे ।
मेरे प्रियतम श्री कृष्ण के वियोग में सारा संसार सूना लगता है। जो मुझे मेरे प्रिय प्रभु श्री श्यामसुंदर से मिलवा देगा, उसके लिए मैं अपना मन और तन न्योछावर कर दूंगी।
हे किशोरी जी! तुम्हारी शरण में आए हुए इस जीव की लाज अब तुम्हारे ही हाथ है। हे रसिकन की सिरताज! अब आपके दर्शन के बिना मेरा मन कहीं नहीं लगता ।
हे राधेरानी, अब मेरे ह्रदय में धीरज नहीं है । तुम्हारे दर्शन के बिना अब एक पल का भी चैन नहीं और क्षण क्षण व्याकुल रहता हूँ ।
सुखकारी “श्री राधा” नाम को रटो । श्री श्यामा प्यारी रूप से उज्जवल हैं और समस्त सखियों की सरदार हैं ।