राग दरबारी

राग दरबारी आसावरी थाट से संबंधित है। यह राग वातावरण में एक गंभीर, भारी और ध्यानपूर्ण स्थिति उत्पन्न करता है। राग दरबारी मध्य रात्रि के तीसरे प्रहर में 12 बजे से 3 बजे के मध्य गाया जाता है।

6 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. तुम नाम जपन क्यों छोड़ - श्री खालस जी

    हे जीव! तुमने भगवान के नाम का जप करना क्यों छोड़ दिया? तुमने अपने भीतर के क्रोध और असत्य बोलने की आदत को तो नहीं त्यागा, परंतु सत्य वचनों का मार्ग क्यों छोड़ दिया?

  2. पिय बिन सूनो छै जी म्हारो देस - श्री मीरा बाई

    मेरे प्रियतम श्री कृष्ण के वियोग में सारा संसार सूना लगता है। जो मुझे मेरे प्रिय प्रभु श्री श्यामसुंदर से मिलवा देगा, उसके लिए मैं अपना मन और तन न्योछावर कर दूंगी।

  3. किशोरी राखो शरण गहे की लाज - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (120)

    हे किशोरी जी! तुम्हारी शरण में आए हुए इस जीव की लाज अब तुम्हारे ही हाथ है। हे रसिकन की सिरताज! अब आपके दर्शन के बिना मेरा मन कहीं नहीं लगता ।