नाथ अनाथनकी सब जानै - श्री युगल प्रिया
हे नाथ! आप अनाथों और असहायों के हृदय की सब बातें भली-भांति जानते हैं। मैं कब से आपके द्वार पर खड़ी पुकार रही हूँ, पर आप अपने कानों से मेरी करुण पुकार सुन क्यों नहीं रहे? क्या आप मुझ पर किसी बात से रूठ गए हैं?
राग हमीर को रात के दूसरे प्रहार में 9 बजे से 12 बजे के बीच गाया जाता है।
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हे नाथ! आप अनाथों और असहायों के हृदय की सब बातें भली-भांति जानते हैं। मैं कब से आपके द्वार पर खड़ी पुकार रही हूँ, पर आप अपने कानों से मेरी करुण पुकार सुन क्यों नहीं रहे? क्या आप मुझ पर किसी बात से रूठ गए हैं?
दिव्य दंपति श्रीराधा-कृष्ण कुंज-भवन में विराज रहे हैं। कृष्ण के सिर पर पीली पगड़ी बँधी है, कटि पर पीला पट है, और कर्णों में सुंदर कुण्डल शोभा दे रहे हैं।
बांके बिहारी की सुंदर छवि मेरी नेत्रों में समा गई है। जब से उस श्यामवर्ण मूर्ति को देखा, तब से वे छवि मेरे नेत्रों से हटती ही नहीं। उनके सिर पर मोरपंख का मुकुट है, कानों में मगर की आकृति वाले कुंडल हैं, और बाईं ओर श्री प्यारी श्रीराधा विराजमान हैं।
वृंदावन छोड़ कर कहीं भी आनंद नहीं है । मनोहर यमुना, सुंदरयुगल सरकार श्री प्रियतम-प्यारी (राधा-कृष्ण), एवं कदंब की छाया आदि अति मन मोहक है।
अब मुझे श्री राधा की अमूल्य कृपा धाम प्राप्त हुआ है । श्री वृंदावन धाम में अब मैं, प्रेम में उन्मत्त सा होकर, घूमता हूँ । अब ऐसा क्या शेष पाना बचा है ?
मुझे श्री वृंदावन अति प्रिय है ! अत्यंत सुंदर फूल खिल रहे हैं, चारों तरफ से सुगंध आ रही है और भ्रमरों की गुंजार से सारा वातावरण गूंज रहा हैं। तोते और बुलबुल मधुर गान कर रहे हैं और हिरण समूह विचरण कर रहे हैं और पक्षी चारों ओर हैं।