श्रीराधारमण अधर रचि बीरी - श्री गुणमंजरी दास
श्री राधारमण के अधरों पर सुंदर पान की बीरी की लालिमा चमक रही है। सखियाँ मंत्रमुग्ध होकर उस छवि को निहार रही हैं।
श्री गुण मंजरी दास का असली नाम श्री गोस्वामी गल्लू जी था। इनका जन्म सन 1884 में हुआ था । यह श्री राधारमणी गोस्वामी श्री रमण दयालु जी के पुत्र थे ।
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श्री राधारमण के अधरों पर सुंदर पान की बीरी की लालिमा चमक रही है। सखियाँ मंत्रमुग्ध होकर उस छवि को निहार रही हैं।
श्रीराधारमण के नयन अत्यंत नुकीले हैं, जो बृज की नवयुवतियों के मन-रूपी माणिक्य को बींध देते हैं। उनके नयन इतने प्रभावशाली हैं कि वाणी उनका वर्णन नहीं कर सकती।
श्री राधारमण की सुन्दर छवि मेरे हृदय में बसी हुई हैं। उनकी सखियाँ उनकी रूप-माधुरी का आस्वादन करती रहती हैं ।
श्री राधारमण नट नागर हैं । ललित त्रिभंगी मुद्रा में सुशोभित सुन्दर श्री श्याम जू परम उज्वल रस के सागर हैं।
मेरे ह्रदय में श्री राधा रमण की मुस्कान ऐसी बस गई है कि अब मुझे न तो विधि-निषेध का पालन पसंद आता है और न ही लोक कुल की मर्यादा आदि ही भाती है ।
ललित त्रिभंगी, श्याम वर्ण वाले, सुंदर कटि एवं पीले वस्त्र धारण करने वाले श्री राधारमण लाल ही हमारे साँचे मीत हैं ।
माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।
श्री राधारमण लावण्यमय श्यामवर्ण के हैं जिनकी रूप माधुरी नित्य ही नयी नयी रहती है, जो सदा किशोर अवस्था वाले हैं और जिनका अंग अंग मन को मोहने वाला है ।
हे श्री राधारमण लाल, यदि आप मुझे कुछ देना चाहते हैं, तो कृपया मुझे अपनी प्राण प्रिया (श्री राधा) के परिकर की दासी बना दीजिए ।
हमारा धन एकमात्र श्री श्यामा [श्री राधे] ज़ू का नाम है जिसे नित्य निरंतर श्री नंद नंदन घनश्याम [श्री कृष्ण] रटते हैं ।