श्री प्रेम जी
श्री प्रेम जी, वृंदावन के एक रसिक कवि।
10 लेख उपलब्ध हैं
ऐसो चटक मटक सो ठाकुर तीनों लोकन हूँ में नाय - श्री प्रेमी जी
ऐसा चटकीला एवं मटकीला बाँके बिहारी जैसा ठाकुर तो तीनों लोकों में कहीं नहीं है । यह तीन ठौर से टेढ़ा है जिसके करतब नट के समान हैं एवं अपनी तिरछे नयनों से सब पर तीर चलाता है । यह सब देवों का देव है, एवं ब्रज में गायों को चराता है ।
मन भूल मत जैयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी
हे मन, श्री राधा रानी के चरण कमलों को मत भूलना। श्यामा प्यारी के दिव्य चरण कमल, और ठाकुर बांके बिहारी की मनमोहिनी ठकुरानी के चरण कमल।
तत्वन को तत्व जगजीवन श्री कृष्ण चन्द्र
माना श्री कृष्ण सभी तत्वों के तत्व हैं लेकिन श्री कृष्ण की आत्मा एवं उनका मूल तत्व तो वृषभानु किशोरी श्री राधा हैं ।
प्रीत जानके ही थोरी तोहे राखेगी शरण - श्री प्रेमी जी
श्री राधा हमारी थोड़ी सी प्रीत जान कर ही अपनी शरण में रखती हैं। अरे मन, श्री राधारानी के चरणों को भूल मत जाना।
ऐ रे मन मतवारे छोड़ दुनियाँ के द्वारे - श्री प्रेमी जी, ब्रज के सवैया
अरे मेरे मूर्ख मतवारे मन, तू दुनिया के द्वारों में भटकन छोड़ दे। अब तो तू केवल और केवल राधा नाम को ही सहारा बना और जीवन मरण श्री राधा रानी को सौंप दे।
मन भूल मत जइयो राधा रानी के चरण - श्री प्रेमी जी
अरे मन, श्री राधारानी के चरणों को भूल मत जाना।
मन तोह मिले, विश्राम वही, वृषभान किशोरी के पायन में
जब तुझे ऐसी वृषभानु किशोरी श्री राधारानी जैसी स्वामिनी मिल गयी और उनके चरणों का आश्रय मिल गया तो तू संसार में क्यों भटक रहा है? तुझे उनके चरणों में ही विश्राम मिलेगा और कहीं नहीं।
प्रेम सरोवर छाँड़ि कैं तू - श्री प्रेमी जी
अरे मन, प्रेम के सरोवर का त्याग कर, तू अपने बनाए हुए काल्पनिक संसार में भटक कर क्यों जीवन समाप्त कर रहा है? जहाँ अनेक गुलाब और गेंदे खिले हैं, तू उस वन को छोड़ क्यों करील की छांव में बैठा है?
भूमि तत्व जल तत्व अग्नि तत्व पवन तत्व - श्री प्रेमी जी
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, ब्रह्मा, विष्णु और अन्य सभी तत्व श्री राधा के ही अंश हैं।
जहाँ गेंदा गुलाब अनेक खिले, बैठो क्यूँ करील की छावन में - ब्रज के सवैया
अरे मन, जहाँ अनगिनत गुलाब खिले हुए हैं, तू क्यों करील की सूखी छाँव में बैठा है? जब तुझे वृषभानु किशोरी श्री राधारानी जैसी अद्भुत स्वामिनी प्राप्त हो गई, और उनके चरणों का मधुर आश्रय मिल गया, तो तू इस संसार में क्यों भटक रहा है?सच्चा विश्राम तुझे केवल उनके चरणों में मिलेगा, और कहीं नहीं।