ऐसो चटक मटक सो ठाकुर तीनों लोकन हूँ में नाय - श्री प्रेमी जी
ऐसा चटकीला एवं मटकीला बाँके बिहारी जैसा ठाकुर तो तीनों लोकों में कहीं नहीं है । यह तीन ठौर से टेढ़ा है जिसके करतब नट के समान हैं एवं अपनी तिरछे नयनों से सब पर तीर चलाता है । यह सब देवों का देव है, एवं ब्रज में गायों को चराता है ।
