श्री राधा करुणावली [निकुंज केली माधुरी]

'श्री राधा करुणावली' निकुंज केली माधुरी का सत्ताइसवां अध्याय है, जिसकी रचना श्री अली माधुरी जी ने की है, जिसमें 17 दोहों में श्री राधा से उनकी सेवा प्राप्ति हेतु याचना की गयी है।

7 लेख उपलब्ध हैं

  1. मान बडाई ईर्षा हरष शोक दुखदाय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (3)

    हे चतुराई की शिरोमणि, लाडिली श्रीराधे! अभिमान, प्रशंसा, ईर्ष्या और सांसारिक हर्ष-शोक आदि केवल दुखदायी हैं। कृपा कर मुझे इन सब दोषों से बचाकर, अपने चरणकमलों की भक्ति में सदैव लगाए रखो।

  2. जो अपने औगुन कहौं, पाऊँ ओर न छोर - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (8)

    हे श्यामा जू (श्री राधा)! यदि मैं अपने दोषों को गिनाना आरंभ करूँ, तो उनकी कोई गिनती ही नहीं है, वे तो अनंत हैं। किंतु आप तो मेरे अंतरतम हृदय की हर बात को जानने वाली सर्वज्ञा स्वामिनी हैं। इसलिए मैं केवल आपसे ही कृपा की याचना करता हूँ। आपकी अकारण कृपा से ही मेरी बिगड़ी बात बनेगी।

  3. अपनी ओर निहारि के कृपा दृष्टि जो होय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (13)

    हे परम करुणामयी प्यारी जू (श्री राधा)! यदि आप अपनी कृपामयी दृष्टि मेरी ओर डाल देंगीं तो मेरी अनंत जन्मों की बिगड़ी बन जाएगी । इसके अतिरिक्त मेरे पास अन्य कोई साधन नहीं है ।

  4. करुणा सागर लाड़िली - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (2)

    हे करुणा की सागर, श्री लाड़िलीजी (श्री राधा), कृपा करके मुझे अपनाइए, क्योंकि मुझमें न तो कोई बल है, न बुद्धि, और न ही कोई अन्य उपाय (साधन) काम आ रहा है। अब मुझे केवल आपकी कृपा का ही आसरा है ।

  5. जो अपने औगुन कहौं पाऊँ ओर न छोर - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (8)

    हे श्यामा जू (श्री राधा)! यदि मैं अपने दोषों को गिनाना आरंभ करूँ, तो उनकी कोई गिनती ही नहीं है, वे तो अनंत हैं। किन्तु आप तो मेरे अंतरतम हृदय की हर बात को जानने वाली सर्वज्ञा स्वामिनी हैं। इसलिए, मैं केवल आपसे ही कृपा की याचना करता हूँ। आपकी कृपा से ही मेरी बिगड़ी बात बनेगी ।

  6. अली मधुरी की सुनौ, करुणा श्यामा जोय - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (1)

    हे परम करुणामयी स्वामिनी श्री राधा, मेरी विनती को कृपा सुनो! तुम्हारे चरण कमलों को देखे बिना मुझे पल भर को भी चैन नहीं है ।

  7. श्यामा प्यारी लाड़िली जानत सब कौ भाव - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (7)

    हे श्यामा प्यारी (श्री राधा)! आप समस्त जनों के ह्रदय के भावों को जानती हैं। मेरा तो आपके अतिरिक्त अन्य कोई आश्रय नहीं है। आपकी अहैतुकी कृपा के बिना कल्याण का कोई दूसरा मार्ग मुझे दृष्टिगोचर नहीं होता।