विवेक लक्षण बेली

विवेक लक्षण बेली राधा वल्लभ संप्रदाय के चाचा श्री हित वृंदावन दास द्वारा रचित ग्रंथ है जिसमें श्री राधा, कृष्ण और गुरु की महिमा को समर्पित 125 छंद हैं ।

7 लेख उपलब्ध हैं

  1. आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (106)

    जो बीत गया सो बीत गया प्रभु, कृपा कर अब कठोरता न दिखाइए। श्री हित वृंदावन दास जी विनयपूर्वक प्रार्थना करते हैं कि अपने इस दास की लाज को अपने हृदय में धारण कर उस पर कृपा कीजिए।

  2. राधापति गति एक तुम मोकौं और न ठाउँ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107)

    हे राधा पति (श्रीकृष्ण)! आप ही मेरे एकमात्र आश्रय हैं । आपके अतिरिक्त मेरे लिए दूसरी कोई ठौर नहीं है। श्रीहित वृंदावन दास कहते हैं: “मैं बार बार बलिहारी जाऊँ, कृपया मुझे अपने श्रीवृंदावनधाम की निकुंज सेवा का सौभाग्य प्रदान करें।”

  3. जुगल भजन भींज्यौ रहै हिये गहगह्यौ नेह - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (41)

    ऐसा भक्त जो सदा युगल सरकार के भजन में लीन रहता है और जिसका हृदय गूढ़ प्रेम से ओत-प्रोत रहता है, वह तीनों लोकों को पवित्र कर देता है।

  4. रसिक भक्त सौं हित करै - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (27)

    जब जीव किसी वास्तविक रसिक संत से अनन्य प्रेम करके ह्रदय की मैल का पूर्ण निवारण कर लेता है तब ह्रदय में श्री लाड़ली लाल प्रेमपूर्वक खेलने (लीला प्रवेश) लगते हैं।

  5. श्री राधाबल्लभ गुन चरित - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (26)

    जिस अनन्य भक्त के हृदय में श्रीराधावल्लभ लाल के गुणों और उनकी लीलाओं का निरंतर वास रहता है, वह भक्त साक्षात समस्त सुखों और मंगलकारी निधियों का पुंज बन जाता है।

  6. अहो कृष्ण करुणा करौ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (87)

    अहो कृष्ण! कलियुग का प्रभाव अत्यंत प्रबल हो उठा है। कृपा कर मेरे हृदय की व्यथा हर लीजिए और अपनी करुणा से मुझे संरक्षण प्रदान कीजिए।