युगल स्नेह पत्रिका
युगल स्नेह पत्रिका श्री राधा कृष्ण प्रेम को समर्पित ग्रंथ है ।
रचैयता : श्री वृंदावन दास चाचा जी
6 लेख उपलब्ध हैं
दुलह-दुलहिन हाथ डोरना - चाचा श्री हित वृंदावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (58)
सखियाँ दुलह-दुलहिन श्री श्यामाश्याम का विवाह करने हेतु उनके कर-कमलों में कंकण बांधे रखती हैं, क्यूँकि सखियों को सब दिनों में विवाह का दिन अत्यंत प्रिय है, जिसके रस में वे नित्य डूबी रहती हैं ।
जो पथ रसिक महा मति जानै - चाचा श्री हित वृंदावन दास, श्रीयुगल सनेह पत्रिका (57)
रसिकजन जिस पथ को जानते हैं वह रासेश्वरी श्री राधा रानी की अकारण कृपा से ही जानते हैं। जो शुद्ध मन से (अधर्म का त्याग करके) इस मार्ग का श्रवण, कीर्तन एवं अनुसरण करता है, उसे दिव्य प्रेम-रस की प्राप्ति होती है।
यह रस ब्रह्मलोक पाताल अवनी हूँ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, युगल स्नेह पत्रिका (55)
यह ऐसा अद्बुत रस है जो ब्रह्म लोक एवं पाताल लोक में नहीं देखने को मिलता, इस वृंदावन रस के लिए वैकुंठ के जन भी तरसते हैं ।
अचरज धाम नाम वृन्दावन, रसमय सृष्टि जहाँ है - श्री वृंदावन दास चाचा जी, युगल स्नेह पत्रिका (60)
श्रीवृन्दावन नामक एक आश्चर्यमय धाम है, जहाँ रसमय सृष्टि है।
देखा देखी रसिक न ह्वैहैं, यह मारग है बंका - श्री हित वृंदावन दास जी, युगल स्नेह पत्रिका (111)
श्री राधा कृष्ण के रसिक भक्तों को देख कर उनकी नक़ल करने से कोई रसिक कैसे हो सकता है, यह रस का मार्ग तो बड़ा टेड़ा है।
रसमय धाम सृष्टि - श्री वृंदावन दास चाचा जी, युगल स्नेह पत्रिका (102)
वृन्दावन जैसा रसमय धाम, जिसकी रसमय अलौकिक कथा भी जग से न्यारी है, एक मात्र श्री रासेश्वरी [श्री राधा] की कृपा से ही प्राप्त किया जा सकता है, इसका और कोई भी अधिकारी नहीं है। [1]