राधा नाम जपौ दिन रैना - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (72)
निशदिन राधा‑नाम का ही भजन करना चाहिए। जब कोई मुझे यह नाम सुनाता है, तभी मेरे हृदय को वास्तविक शांति (चैन) मिलती है।
राग मालकौंस / मालकोस का निर्माण देवी सरस्वती ने शिव को शांत करने के लिए किया था जब भगवान शिव उग्र थे और माता सती के बलिदान के क्रोध में तांडव उपरान्त शांत नहीं हो रहे थे। यह राग मध्यरात्रि 12 बजे से 3 बजे के बीच गाया जाता है।
11 संकीर्तन उपलब्ध हैं
निशदिन राधा‑नाम का ही भजन करना चाहिए। जब कोई मुझे यह नाम सुनाता है, तभी मेरे हृदय को वास्तविक शांति (चैन) मिलती है।
अब मेरी सुरत (चेतना) रस में रम गई है । राधा-कृष्ण की युगल छवि मेरे नेत्रों में समा गई है और मेरा हृदय उनके प्रेम की डोरी में बँध गया है।
हे श्रीराधा! मेरे बनाए तो कुछ भी सिद्ध नहीं होगा। मैं तो सदैव से अवगुणों से युक्त हूँ — मुझमें कूट-कूट कर बुराइयाँ भरी हुई हैं।
हे प्यारी जू! देखो, वृंदावन के सघन कुंज किस प्रकार पुष्पों से भरकर अपनी अनुपम शोभा बिखेर रहे हैं। इन लताओं में कोयल मधुर स्वर में गान कर रही है, मानो प्रेम का संदेश सुना रही हो।
अरी सखी! देखो, ब्रज की हर एक गली में आनंद के सागर स्वयं हरि, प्रेमपूर्वक होली खेल रहे हैं। मधुर गीतों, हास-परिहास और लीलाओं के मध्य, हजारों सखाओं के संग वे रंगों की इस उत्सवमयी रसधारा में मग्न हो रहे हैं।
हमारी प्रिया श्री राधा अत्यंत छबीली और मनमोहिनी हैं, जिनकी छवि का स्मरण करने और दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।
हे स्वामिनी [श्री राधे]! मुझे तो एक मात्र तुम्हारी ही आशा है । युगल रस का पान किए बिना मेरी अखियाँ जल से पृथक मीन के समान तड़प रही हैं ।
रासेश्वरी श्री राधा की जय हो, जिनका ह्रदय वंशी ध्वनि के श्रवण से ही प्रेम-रंग में परम हुल्लसित हो उठता है ।
दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण सवेरे के भोग पाने के लिए विराज रहे हैं । श्री राधा कृष्ण मध्य में विराज रहे हैं, ललिता एवं अन्य सखियाँ कनक [सोने] के पात्र में उन्हें परोस रही हैं ।
श्री नागरीदास कहते हैं, "रमणीक श्री वृन्दावन मे श्री श्यामसुंदर अपने सखाओं के संग पुष्प चयन कर रहे हैं एवं उसी समय वहाँ अति सुकुमार श्री श्यामा जू आ गईं और जब दोनों ने एक दूसरे को देखा, तो बस देखते ही रह गए।"
कृपया मुझे ब्रज धाम में एक वृक्ष पर एक लता या एक पत्ता बना दें! तब मैं गोपियों के चरण कमलों से निसृत परम पवित्र रज में अपना सिर स्नान कर सकूंगा।