राग मालकौंस

राग मालकौंस / मालकोस का निर्माण देवी सरस्वती ने शिव को शांत करने के लिए किया था जब भगवान शिव उग्र थे और माता सती के बलिदान के क्रोध में तांडव उपरान्त शांत नहीं हो रहे थे। यह राग मध्यरात्रि 12 बजे से 3 बजे के बीच गाया जाता है।

11 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. फूल्यो री सघन वन तामे - श्री सूरदास, सूर सागर

    हे प्यारी जू! देखो, वृंदावन के सघन कुंज किस प्रकार पुष्पों से भरकर अपनी अनुपम शोभा बिखेर रहे हैं। इन लताओं में कोयल मधुर स्वर में गान कर रही है, मानो प्रेम का संदेश सुना रही हो।

  2. देखो देखो ब्रजकी बीथिनि बीथिनि खेलत हैं हरि होरी - श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी (68)

    अरी सखी! देखो, ब्रज की हर एक गली में आनंद के सागर स्वयं हरि, प्रेमपूर्वक होली खेल रहे हैं। मधुर गीतों, हास-परिहास और लीलाओं के मध्य, हजारों सखाओं के संग वे रंगों की इस उत्सवमयी रसधारा में मग्न हो रहे हैं।

  3. हमारी प्रिया छबीली राधा - श्री हित गोपाल दास [सेवा कुञ्ज वाले], निकुंज रस वल्लरी (99)

    हमारी प्रिया श्री राधा अत्यंत छबीली और मनमोहिनी हैं, जिनकी छवि का स्मरण करने और दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार की बाधाएँ स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

  4. मोकों आस स्वामिनी तेरी - ललित किशोरी जी, अभिलाष माधुरी, विनय (75)

    हे स्वामिनी [श्री राधे]! मुझे तो एक मात्र तुम्हारी ही आशा है । युगल रस का पान किए बिना मेरी अखियाँ जल से पृथक मीन के समान तड़प रही हैं ।

  5. जैंवत लाल लाड़िली राजें - श्री हरिराय जी

    दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण सवेरे के भोग पाने के लिए विराज रहे हैं । श्री राधा कृष्ण मध्य में विराज रहे हैं, ललिता एवं अन्य सखियाँ कनक [सोने] के पात्र में उन्हें परोस रही हैं ।

  6. रहै दोऊ बदन निहार निहार - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (41)

    श्री नागरीदास कहते हैं, "रमणीक श्री वृन्दावन मे श्री श्यामसुंदर अपने सखाओं के संग पुष्प चयन कर रहे हैं एवं उसी समय वहाँ अति सुकुमार श्री श्यामा जू आ गईं और जब दोनों ने एक दूसरे को देखा, तो बस देखते ही रह गए।"

  7. ब्रज की लता-पता मोहि कीजै - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मालिका (67)

    कृपया मुझे ब्रज धाम में एक वृक्ष पर एक लता या एक पत्ता बना दें! तब मैं गोपियों के चरण कमलों से निसृत परम पवित्र रज में अपना सिर स्नान कर सकूंगा।