राधा गोविंद गीत

राधा गोविंद गीत एक काव्य रचना है और जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की स्मारकीय कृति है। इसमें 11,111 दोहों का संग्रह, दर्शन तत्त्वज्ञान का सार है, श्री युगल सरकार की लीला, ब्रज वृंदावन धाम के रस इत्यादि को सरल रूप में प्रकट किया गया। लेखकः जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज

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  1. राधे नाम लेने वाला गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी, राधा गोविन्द गीत (6732)

    जो जीव राधे नाम का जप करता है वह अभिमान पूर्वक [श्री राधा के प्रेम में विभोर] चलता है भले ही वह साक्षात भगवान श्री हरि के सामने चले ।

  2. प्यारी के पक्ष वारे गोविंद राधे - श्री कृपालु जी, राधा गोविन्द गीत (6393)

    श्री प्यारीजू [राधा] के पक्ष वाले [जो अनन्य, निष्काम एवं नित्य श्री राधा की भक्ति करते हैं] औरों की तो क्या स्वयं भगवान श्याम सुंदर से भी नहीं भयभीत होते अपितुं उन्हें भी भौहें दिखा देते हैं।

  3. मन रह वृन्दावन गोविंद राधे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (5929)

    हे श्री राधा गोविंद, मेरा शरीर भले ही चौरासी लाख योनियों में भटकता रहे, परंतु मेरे मन को श्री वृन्दावन धाम का वास दिला दीजिये।