श्री हित परमानंद दास

श्री हित परमानंद दास वृंदावन के श्री राधा वल्लभ संप्रदाय के एक रसिक संत हुए हैं ।

24 लेख उपलब्ध हैं

  1. हित मूरति हित प्रेम निधि - श्री हित परमानंद दास जी, श्रीराधा रस सहस्रनाम

    श्री राधा साक्षात् प्रेम की मूर्ति हैं, वे प्रेम की निधि हैं, तथा प्रेम का मूल आधार हैं। श्रीराधा सर्वथा केवल प्रेम से ही भरी हुई हैं, उनका रोम-रोम प्रेम-रस से परिपूर्ण है।

  2. सुघर सुजान स्वामिनी मेरी - श्री हित परमानंद दास जी, श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (74)

    संपूर्ण सौंदर्य की पराकाष्ठा और समस्त कलाओं की परम ज्ञाता (सुजान) श्री राधा महारानी जू ही मेरी एकमात्र आराध्या स्वामिनी हैं।

  3. सुनियें अरज हमारी श्रीवृषभानु कुमारि - श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (87)

    हे श्रीवृषभानु-नन्दिनी श्री राधा! मेरी इस करुण विनय को कृपापूर्वक स्वीकार कीजिए। हे प्रियतम (श्रीकृष्ण) के प्राणाधार स्वरूपा स्वामिनी! अपनी करुणा-दृष्टि से मुझे अनुग्रहित कर अपने दिव्य एवं मनोहर स्वरूप का दर्शन प्रदान करें।

  4. नाम राधिका के सुनत हित सौं मोहनलाल - श्री हित परमानंद दास जी

    श्रीराधिका का नाम श्री मोहनलाल (श्रीकृष्ण) अत्यन्त प्रेमपूर्वक सुनते हैं। “राधा” नाम के प्रभाव से वशीभूत होकर, परम आनंद प्रदान करने वाले श्रीकृष्ण कृपा-वश जीव पर करुणा करते हैं और उसे दिव्य सुख प्रदान करते हैं।

  5. भजौ मन राधे महारानी - श्री हित परमानंद दास जी की वाणी, पदावली (79)

    हे मन! श्री राधा महारानी जू का अनन्य भाव से भजन करो। जिनके रसपूर्ण यश को मनमोहन श्री कृष्ण भी उन्मत्त होकर गान करते हैं एवं जो सबको सुख प्रदान करने वाली हैं।

  6. मेरी अँखियाँ राधा-रूप पगीं - श्री हित परमानंद दास जी

    मेरी आँखें श्री राधा के दिव्य रूप में ऐसी रँगी हुई हैं कि उनकी मधुर मुस्कान में बिना मूल्य के बिक चुकी हैं। वे उनसे मोहित होकर दिन-रात जागती रहती हैं।

  7. पंछी बरसाने जिते पशु अरु गोपी-गोप - श्री हित परमानंद दास जी

    बरसाने के सभी पक्षी, पशु, गोपियाँ और गोप — सभी का जीवन-प्राण श्री राधिका ही हैं, और उनके हृदय में श्री राधा की ही दिव्य कान्ति सदा विराजमान रहती है।

  8. डोल झूलिये दोऊ प्यारे - श्री हित परमानंद दास जी

    दोनों प्यारे (प्रिया-प्रियतम) कुंजमहल में फूलों से सजे हुए झूले पर झूल रहे हैं । कुंजमहल में फूलों की सुंदर सजावट की गई है, खिले हुए फूलों से ही हर कोना सँवारा गया है।

  9. नवल किशोरी गोरी राधा गाइये - श्री हित परमानंद दास

    गौर वर्ण वाली नवल किशोरी श्री राधा का गुण गान कीजिए । ऐसी कृपा हो मुझ पर कि श्री राधा, जो श्री कृष्ण के प्राणों की प्रिया हैं और समस्त सखियों की चित्तचोरी प्यारी, वे मुझे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन प्रदान करें।

  10. बरसाने रस-सिंधु तें प्रगटी राधा-रत्न - श्री हित परमानंद दास जी

    बरसाना रूपी रस-सागर से श्री राधा रूपी अनमोल रत्न प्रकट हुआ है। श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं, “पूर्ण प्रयास और प्रेम से इस अमूल्य रत्न को अपने हृदय में सदा के लिए धारण करो।”

  11. कुँवरि लड़ैती लाड़िली, लाड़ गहेली भाम - श्री हित परमानंद दास जी

    कुँवरि श्री राधा अति लाड़ली हैं एवं श्री श्यामसुन्दर की प्रिया हैं जिन्हें वे सदा अपने ह्रदय से लगाकर रखते हैं । श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं कि वे प्रेमपूर्वक “राधा राधा” नाम का भजन करते हैं ।