हित मूरति हित प्रेम निधि - श्री हित परमानंद दास जी, श्रीराधा रस सहस्रनाम
श्री राधा साक्षात् प्रेम की मूर्ति हैं, वे प्रेम की निधि हैं, तथा प्रेम का मूल आधार हैं। श्रीराधा सर्वथा केवल प्रेम से ही भरी हुई हैं, उनका रोम-रोम प्रेम-रस से परिपूर्ण है।
श्री हित परमानंद दास वृंदावन के श्री राधा वल्लभ संप्रदाय के एक रसिक संत हुए हैं ।
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श्री राधा साक्षात् प्रेम की मूर्ति हैं, वे प्रेम की निधि हैं, तथा प्रेम का मूल आधार हैं। श्रीराधा सर्वथा केवल प्रेम से ही भरी हुई हैं, उनका रोम-रोम प्रेम-रस से परिपूर्ण है।
संपूर्ण सौंदर्य की पराकाष्ठा और समस्त कलाओं की परम ज्ञाता (सुजान) श्री राधा महारानी जू ही मेरी एकमात्र आराध्या स्वामिनी हैं।
हे नवल-नागरी श्री वृषभानु किशोरी (श्री राधा)! मेरी विनती सुनिए और मुझ दीन की सुधि लीजिए।
रसिकाचार्य श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी का आश्रय-धाम श्रीवृन्दावन है। वहाँ समस्त रसिक ‘राधा राधा’ नाम का ही जप करते हैं।
हे श्रीवृषभानु-नन्दिनी श्री राधा! मेरी इस करुण विनय को कृपापूर्वक स्वीकार कीजिए। हे प्रियतम (श्रीकृष्ण) के प्राणाधार स्वरूपा स्वामिनी! अपनी करुणा-दृष्टि से मुझे अनुग्रहित कर अपने दिव्य एवं मनोहर स्वरूप का दर्शन प्रदान करें।
श्रीराधिका का नाम श्री मोहनलाल (श्रीकृष्ण) अत्यन्त प्रेमपूर्वक सुनते हैं। “राधा” नाम के प्रभाव से वशीभूत होकर, परम आनंद प्रदान करने वाले श्रीकृष्ण कृपा-वश जीव पर करुणा करते हैं और उसे दिव्य सुख प्रदान करते हैं।
हे मन! श्री राधा महारानी जू का अनन्य भाव से भजन करो। जिनके रसपूर्ण यश को मनमोहन श्री कृष्ण भी उन्मत्त होकर गान करते हैं एवं जो सबको सुख प्रदान करने वाली हैं।
मेरी आँखें श्री राधा के दिव्य रूप में ऐसी रँगी हुई हैं कि उनकी मधुर मुस्कान में बिना मूल्य के बिक चुकी हैं। वे उनसे मोहित होकर दिन-रात जागती रहती हैं।
हे राधा, हे राधे, हे राधिके—तुम रूप-सौंदर्य की खान हो। श्री हित परमानन्द दास कहते हैं कि “राधा-राधा” निज मंत्र ही मेरा जीवन प्राण है।
श्री राधा महारानी की जय बोलो—श्री धाम वृन्दावन, जो अखिल लोकों की राजधानी है, उसमें एकछत्र (एक मात्र) श्री राधा जू का ही राज है।
बरसाने के सभी पक्षी, पशु, गोपियाँ और गोप — सभी का जीवन-प्राण श्री राधिका ही हैं, और उनके हृदय में श्री राधा की ही दिव्य कान्ति सदा विराजमान रहती है।
दोनों प्यारे (प्रिया-प्रियतम) कुंजमहल में फूलों से सजे हुए झूले पर झूल रहे हैं । कुंजमहल में फूलों की सुंदर सजावट की गई है, खिले हुए फूलों से ही हर कोना सँवारा गया है।
गौर वर्ण वाली नवल किशोरी श्री राधा का गुण गान कीजिए । ऐसी कृपा हो मुझ पर कि श्री राधा, जो श्री कृष्ण के प्राणों की प्रिया हैं और समस्त सखियों की चित्तचोरी प्यारी, वे मुझे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन प्रदान करें।
श्रीधाम बरसाना, स्वयं श्री राधिका जू का निज गाँव है, जहाँ के प्रत्येक जीव अनन्य भाव से सदा-सर्वदा “राधा नाम” का मधुर गान करते रहते हैं।
बरसाना वासियों की श्रीराधा ही आधार हैं। समस्त बरसाना वासी श्री राधा के प्यारे हैं एवं उनको भी श्री राधा से ही अनन्य प्रेम है।
बरसाना में हर ओर से केवल “राधा- राधा” नाम ही सुनाई देता है । बरसाना वासी दिन-रात श्री राधा को लाड़ लड़ाने में ही मग्न रहते हैं।
बरसाना रूपी रस-सागर से श्री राधा रूपी अनमोल रत्न प्रकट हुआ है। श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं, “पूर्ण प्रयास और प्रेम से इस अमूल्य रत्न को अपने हृदय में सदा के लिए धारण करो।”
कुँवरि श्री राधा अति लाड़ली हैं एवं श्री श्यामसुन्दर की प्रिया हैं जिन्हें वे सदा अपने ह्रदय से लगाकर रखते हैं । श्री हित परमानंद दास जी कहते हैं कि वे प्रेमपूर्वक “राधा राधा” नाम का भजन करते हैं ।
हे श्री वृन्दावन धाम की महारानी श्री राधा, कृपाकर प्रेम पूर्वक सुनिए! प्यारे श्री लाल जी सदा “राधा” नाम की माला जपते रहते हैं।
श्री कृष्ण श्री राधा नाम को सुनकर सुख पाते हैं । जो जन श्री राधा नाम को जपते हैं उनके ह्रदय में अनायास ही श्यामसुन्दर बस जाते हैं ।