रे मन राधे राधे रटि निशिभोर - श्री किशोर दास
हे मन, निशिदिन राधे राधे रट । समस्त सांसारिक उपाधियों को त्याग कर, निरंतर भक्ति का अभ्यास कर जिससे तुम नित्य किशोर, श्री राधा कृष्ण के सदा अंग-संग ही रहोगे ।
श्री किशोरदास जी की वाणी श्री श्यामश्याम की दिव्य लीलाओं, भक्ति के सिद्धांतों, रसिक आचार्यों की प्रशस्ति आदि से युक्त विभिन्न छोटी रचनाओं का संग्रह है ।
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हे मन, निशिदिन राधे राधे रट । समस्त सांसारिक उपाधियों को त्याग कर, निरंतर भक्ति का अभ्यास कर जिससे तुम नित्य किशोर, श्री राधा कृष्ण के सदा अंग-संग ही रहोगे ।
अनेक साधक श्रीवृंदावन वास की अभिलाषा तो करते हैं, किंतु उनका कभी ऐसा संयोग घटित नहीं हो पाता। प्रभु की यह माया इतनी विचित्र है कि प्रबल इच्छा के उपरांत भी जीव को ब्रज-वास के सौभाग्य से वंचित रखती है।
कहीं कर्म और धर्म की साधना की भूमि है, कहीं तप और ज्ञान-यज्ञ का क्षेत्र है; परंतु श्री वृंदावन धाम तो विशुद्ध प्रेम की भूमि है, जिसके बिना श्री किशोरदास की कहीं भी वास्तविक गति नहीं है।
श्री वृन्दावन साक्षात् मंगलमणि और आनंद की निधि है, जो परम प्रेम-रस का ही साकार स्वरूप है। ऐसे अनुपम श्री वृंदा-विपिन की महिमा अनंत है, जिसकी तुलना संसार की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती।
परम [दिव्य] प्रेम रस का साक्षत धारण किया हुआ रूप ही श्री धाम वृंदावन है जहां सर्वोपरि रसिक उपासक, अनूप [सब से निराले] संत जन नित्य ही विचरण करते हैं ।
समस्त वनों का राजा श्री वृंदावन धाम है, क्योंकि यहाँ श्यामसुंदर के वामांग में परम रमणीय स्वरूप वाली श्री स्वामिनीजी (श्री राधा) प्रेम में उन्मत्त होकर नित्य विराजमान रहती हैं।
श्री वृन्दावन-वास फलस्वरूप है, जिसे प्राप्त करने में अनेक विघ्न आ सकते हैं। इसे प्राप्त करने का अन्य कोई उपाय नहीं; केवल नित्य किशोरी श्री राधिका की कृपा से ही यह सुलभ होता है।
साधक को चाहिए कि वह मन से सदा वृन्दावन-विपिन में निवास करे और सखी-भाव धारण करके नित्य श्री ललना-लाल, अर्थात् राधा-कृष्ण, की मधुर छवि का दर्शन करता रहे।
सर्वोपरि नित्यविहारिनी ज़ू साक्षात श्री राधिका रानी अत्यंत मोहिनी हैं जिन्हें निरख कर अखिल विश्व को मोहित करने वाले, साक्षात कामदेव को भी मोह लेने वाले श्याम सुंदर भी मोहित हो जाते हैं ।
हे स्वामिनी, जो नित्य निकुंजों में नित्य विहार पारायण हैं, जिनका नाम “श्री राधे है", हे श्यामा! आप मुझ पर कब कृपा करोगी?