विनय के पद [श्री किशोरी अलि]

विनय के पद श्री वंशी अली जी के शिष्य श्री किशोरी अली द्वारा लिखा गया है जिसमें बहुत सुंदर प्रार्थना एवं विनती के पद।

9 लेख उपलब्ध हैं

  1. जिन जिन अपराधिन सिर नायौ - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (37)

    जिन-जिन अपराधी जीवों ने सिर झुकाकर और रसना से आपका नाम उच्चारित किया, उन्हें आपने अपने निज परिकर में स्थान देकर अपनी सेवा का अधिकारी बना लिया।

  2. रुप हू के रुप तै अनूप रुप प्यारी को - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (8)

    श्रीराधा का रूप-सौंदर्य ऐसा है कि साक्षात रूप भी उनके अनुपम रूप-सौंदर्य की तुलना में फीका लगता है। वे समस्त संसार को उज्ज्वल करने वाली तथा जगजीवन श्रीकृष्णचंद्र की महारानी हैं। उनका रूप प्रतिक्षण वर्धमान है, जिनके अंगों को निहारकर नेत्र कभी तृप्त नहीं होते।

  3. रूपरासि स्वामिनी हमारी - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (4)

    रूप की राशि, श्री राधा महारानी ही हमारी स्वामिनी हैं । यह ऐसी अलबेली सरकार हैं जो न केवल सखियों को प्राणों के समान प्यारी हैं एवं श्री कुंज बिहारी भी इनको निहार निहार कर ही जीवित रहते हैं ।

  4. हम सौं बाँक न कीजिये, सुनो बाँकेबिहारी - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (51)

    एक भक्त श्री प्रिया जी [श्री राधा] के बल से बिहारीजी [कृष्ण] से कहता है कि हे बाँके बिहारी, सुनो! हम से तो तुम बाँकपन (टेडापन) मत ही करो । हम किशोरी जी के बल के गर्व में भरे रहते हैं, हम सखियों से तुम्हारी ऐंड नहीं चल सकती ।

  5. किशोरी, मोहि देहु वृन्दावन वास - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (23)

    हे किशोरी जू, मुझे वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये, जहाँ मैं हाथ में करुवा लेकर एवं गले में प्रसादी गूंजा माला धारण कर कुञ्ज में निवास प्राप्त करूँ ।

  6. श्री राधा सी स्वामिनि जाकै, कमी कौन बात की ताकैं - श्री किशोरी अलि जी

    जिसकी [जिस जीव की] श्री राधा सी स्वामिनी हैं उसे किस बात की कमी है ? वह ऐसी स्वामिनी हैं जो श्री वृंदावन धाम की ठकुरानी हैं एवं अखिल ब्रह्मांडों के स्वामी श्याम सुंदर भी नित्य ही जिनके चरणों से लगे रहते हैं ।