mangala
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प्रथम सहचरी भाव हिय - श्री रामराय जी, आदिवाणी (102.1)
सर्वप्रथम अपने हृदय में सहचरी-भाव धारण करके स्वयं को मानसी-भाव से कुंज के द्वार पर उपस्थित करना चाहिए, जहाँ मंगलमय श्री युगल किशोर की विविध प्रकार से प्रेमपूर्वक सेवा करते हुए उनका गुणगान करना चाहिए।
गुण मन्दिर सुंदर युगल मंगल मोदनिधान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (184)
युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण) समस्त गुणों के मंदिर हैं और मंगल तथा आनंद के मूल स्रोत हैं। श्री नारायण स्वामी प्रार्थना करते हैं, "हे परम कृपालु युगल वर! कृपा कर मुझे अपने चरण कमलों में प्रेम रूपी अमूल्य वरदान प्रदान करें।"
गोस्वामी श्री हित राधालाल जी की जीवनी
गो. श्रीराधालाल जी का जन्म 1885 की आश्विन बदी तृतीया के दिन वृन्दावन में हुआ था। इनके पिता गो. श्रीगोवर्द्धनलाल जी श्रीराधावल्लभ मन्दिर के रासवंशीय सेवाधिकारी थे।
श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी
माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।
स्वामिनी इतना तो कीजो लाड़ली इतना तो कीजो - ब्रज के सेवैया
हे स्वामिनी जू, इतना तो कीजिये कि इस संसार की आसक्ति को छुड़ाकर श्री वृन्दावन का नित्य वास प्रदान कीजिये।
श्री प्रियाकान्त जू मंदिर - वृन्दावन
श्री प्रियाकान्त जू मंदिर श्री राधा कृष्ण को समर्पित है जिसे 2009 में विश्व शांति चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री देवकीनंदन ठाकुर द्वारा स्थापित किया गया था, और इसे पूरा होने में लगभग सात साल लगे ।
श्री हित गोपालदास जी की जीवनी
श्री गोपालदास जी "लघु सखी" राधावल्लभ संप्रदाय में दीक्षित एक परम भक्त थे। इनका जन्म पंजाब में 1940 के आसपास अनुमानित होता है।
गोस्वामी श्री वनचन्द्र जी की जीवनी
श्री वनचन्द्र गोस्वामी जी श्री हित हरिवंश महाप्रभु के ज्येष्ठ पुत्र थे। इनका जन्म चैत्र कृष्ण छठ 1528 में देववन में हुआ था।
श्री चतुर्भुजदास जी की जीवनी
श्री चतुर्भुजदास जी का जन्म 1597 में ब्रज के जमुनावता ग्राम में हुआ था। इनके पिता अष्टछाप के महान कवी श्री कुम्भनदास जी थे।
श्री परमानन्ददास जी की जीवनी
श्री परमानन्ददास जी का जन्म कन्नौज के एक ब्राह्मण घर में 1493 में हुआ। ये श्री कृष्ण के परमसखा थे और बड़े उच्च कोटि के कवि थे। श्री परमानन्ददास जी अपने रचे पदों को बड़े मधुर राग में गाते और कीर्तन करते। जो भी इनका कीर्तन सुनता वह भाव विभोर हो उठता।
श्री हित रूपलाल जी की जीवनी
1681 ई. के वैशाख कृ० 7 को श्रीहित हरिवंशजी महाराज के कुल में गोस्वामी श्रीरूप लालजी का जन्म हुआ। इनके पिता गोस्वामी श्रीहरिलालजी तथा माता श्रीकृष्णकुँवरि थीं।
कदंब खंडी - काम्यवन
यह स्थान "कदंब खंडी" के रूप में प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें कदंब वृक्षों का विशाल समूह है। यह ब्रज के एक महान संत, निम्बार्क संप्रदाय के श्री नागाजी महाराज की भजन स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध है।
श्री वृन्दा देवी मंदिर, नंदगाँव
पूरा ब्रज मण्डल वृंदा देवी का घर है। इस स्थान के बारे में यह लिखा हुआ है कि नंदगाँव से पश्चिम की ओर डेढ़ मील की दूरी पर आपको वृंदा देवी का निवास मिलेगा।