श्री बनी ठनी (बणी ठणी) जी

विश्व में बणी-ठणी (बनी ठनी जी) के नाम व राजस्थान की मोनालिसा के नाम से मशहूर जो श्री नागरी दास जी की सेवा करती थी, वह भी नागरीदास के वृंदावन वास लेते ही उनके पीछे पीछे वृंदावन आगाई। इनकी समाधि भी वृंदावन में ही है । इनके भी कुछ पद प्राप्त होते हैं जो “रसिक बिहारी" की छाप से हैं ।

8 लेख उपलब्ध हैं

  1. होरी होरी कहि बोले सब ब्रज की नारि - श्री बनी ठनी जी

    सभी ब्रज की नारियाँ "हो हो होरी" कहकर उल्लास से होली खेल रही हैं । नंदगाँव और बरसाने में होली का खेल चल रहा है, और इधर-उधर प्रेम-रस भरी गालियाँ गाई जा रही हैं।

  2. श्री बणीठणी जी की जीवनी 

    श्री बणीठणी जी की रचना बड़ी सरस है एवं युगल किशोर श्री श्यामाश्याम की लीलाओं से परिपुष्ट है। इन्होने अपने उपास्य श्री राधा कृष्ण के यश का विस्तार किया।