कुंजमहल में आज रंग होरी - श्री बनी ठनी जी
आज कुंज-महल में रंगीली होली मची है। फाग खेलते-खेलते एक सुंदर संयोग बना है — राधा और कृष्ण के वस्त्रों की 'गठजोरी' (गाँठ जोड़ना) हो रही है।
विश्व में बणी-ठणी (बनी ठनी जी) के नाम व राजस्थान की मोनालिसा के नाम से मशहूर जो श्री नागरी दास जी की सेवा करती थी, वह भी नागरीदास के वृंदावन वास लेते ही उनके पीछे पीछे वृंदावन आगाई। इनकी समाधि भी वृंदावन में ही है । इनके भी कुछ पद प्राप्त होते हैं जो “रसिक बिहारी" की छाप से हैं ।
8 लेख उपलब्ध हैं
आज कुंज-महल में रंगीली होली मची है। फाग खेलते-खेलते एक सुंदर संयोग बना है — राधा और कृष्ण के वस्त्रों की 'गठजोरी' (गाँठ जोड़ना) हो रही है।
आज बरसाने में मंगल-गान हो रहा है। लाडली श्री राधा का प्राकट्य हुआ है, और हर घर में बधाइयाँ गूंज रही हैं।
अब पौढ़ने को समय आगया है, एक तरफ़ वृक्षों की छाया ढुर गई और दूसरी ओर चन्द्र ढुर गया है ।
श्री प्यारी जू [श्री राधा] की अँखियाँ रतनारी हैं जो प्रेम रस में छकी एवं अलसा रही हैं मानो कमल की पंखड़ी के समान हैं ।
सभी ब्रज की नारियाँ "हो हो होरी" कहकर उल्लास से होली खेल रही हैं । नंदगाँव और बरसाने में होली का खेल चल रहा है, और इधर-उधर प्रेम-रस भरी गालियाँ गाई जा रही हैं।
श्री बणीठणी जी की रचना बड़ी सरस है एवं युगल किशोर श्री श्यामाश्याम की लीलाओं से परिपुष्ट है। इन्होने अपने उपास्य श्री राधा कृष्ण के यश का विस्तार किया।
आज तो रस भरी रंगीन रात्री है, रंग भरी दुल्हन है और रंग भरे पिय श्याम सुंदर, आप दोनों मिलकर वृंदावन के कुंजों में पधारो ।
हे राधा प्यारी जी, आप धीरे धीरे झूला झुलिए ! समस्त सखियाँ गान करते करते नवल रंगीली श्री राधिका को झूला झूला रही हैं ।