भजन कुँडलिया में रहौ - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, भजन कुण्डलियां (22)
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं—हे उपासको! भजन रूपी कुण्डली (घेरा) के भीतर ही निवास करो। कुण्डली से एक पग भी बाहर मत जाओ और अनन्य भाव से केवल श्री लाड़िली - लाल युगल किशोर से सहज प्रीति करो ।
