ब्रज रस माधुरी भाग 3 [श्री कृपालुजी]

ब्रज रस माधुरी जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की काव्य रचना है जो ब्रज रस की माधुरी को प्रकट करती है । रचना में विभिन्न दोहे हैं। इसे तीन भागों में बांटा गया है। लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

8 लेख उपलब्ध हैं

  1. श्री राधे बरसाने वारी, नँदनंदन सुखघन बनवारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (85)

    बरसाने वाली श्री राधा की जय, सुखघन नंदनंदन बनवारी की जय। जब श्री कृष्ण को महारास करने की इच्छा हुई, तब उन्होंने अपना मुकुट उतार कर श्री राधा के चरणों में रखकर रास की याचना की, क्यूंकि महारास की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा ही हैं।

  2. मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (106)

    मेरी राधेरानी प्रेम रूप रस खानी, जाकी करे पूर्ण ब्रह्म श्याम अगवानी। मेरी ऐसी राधेरानी ब्रजरसखानी, जाके पाछे पाछे डोलें सारँगपानी ।।

  3. प्यारी प्यारी भोरी भारी भानुदुलारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (8)

    वृषभानु दुलारी श्री प्रिया जू, जो भोरी हैं, प्यारी हैं, बरसाने वाली हैं, उनकी जय हो, जय हो, जय हो। श्री प्यारी जू आगे-आगे चल रहीं हैं, पीछे सखियाँ चल रहीं हैं और सखियों के पीछे ब्रजेंद्र नन्दन श्री कृष्ण चल रहे हैं।

  4. कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज - ब्रज रस माधुरी 3 (9)

    कृपा करु बरसाने वारी, तेरी कृपा का भरोसा भारी । तेरा मन है कृपा का प्यारी , तेरा तन है कृपा का प्यारी। तेरी कृपा तो कृपा है प्यारी, तेरा कोप भी कृपा है प्यारी | तेरी कृपा चह बनवारी, तेरी कृपा की है बलिहारी |

  5. जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (14)

    जय हो जय हो अलबेली सरकार बलिहार बलिहार । तेरी महिमा अपरंपार बलिहार बलिहार । तेरी ब्रम्ह करे जयकार बलिहार बलिहार ।

  6. जय श्री वृषभानु दुलार की - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 3 (100)

    वृषभानु नंदिनी श्री राधा रानी की जय। अलबेली सरकार की जय। नंदकुमार श्री कृष्ण द्वारा सेवित स्वामिनी की जय। जिनकी दया का भण्डार कभी समाप्त नहीं होता उन दयामयी की जय हो।