चाहे तू योग करि - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (11)
चाहे तू योग किया कर, अथवा भृकुटी के मध्य उसका ध्यान किया कर, अथवा चाहे तू उसका नाम, रूप मिथ्या जान कर उसे निहारने की कोशिश किया कर।
पद सिद्धांत ब्रज विहार ग्रन्थ का एक अध्याय है जिसमे श्री नारायण स्वामी द्वारा लिखित सिद्धांत के पदों का संकलन है। रचैयता: श्री नारायण स्वामी
9 लेख उपलब्ध हैं
चाहे तू योग किया कर, अथवा भृकुटी के मध्य उसका ध्यान किया कर, अथवा चाहे तू उसका नाम, रूप मिथ्या जान कर उसे निहारने की कोशिश किया कर।
हे जीव, जिनका न कोई आदि है और न ही अंत, जो समस्त शास्त्रों वेदों के सार स्वरूप हैं, ऐसे गोविंद [भगवान कृष्ण] का भजन कर जिन्हें सुर, नर, मुनि एवं भगवान ब्रह्मा भी भजते हैं।
अरे मन, अब तू जाग जा, नहीं तो तू बहुत पछतायगा। तुझे जिसको भजना चाहिए, उनको तूने भुलाया हुआ है । अत्यंत कृपालु श्री कृष्ण का नित्य भजन कर, केवल वही तुझे पार लगा सकते हैं ।
अरे मन, नन्दनन्दन श्री कृष्ण का स्मरण कर। हे मन, मुझे ध्यान से सुन, यह महान अवसर तुझको फिर से प्राप्त नहीं होगा। श्री कृष्ण के मुख पर उनके घुंघराले काले केश हैं और कानों में स्वर्ण कुण्डल झिलमिला रहे हैं।
मैं श्री श्यामा श्याम के चरण कमलों की वंदना करता हूँ जिनकी महिमा अनंत है और जिन्हें वेद भी विभिन्न छन्दों द्वारा गा रहे हैं।
श्री वृंदावन धाम धन्य है । श्री वृंदावन धाम की महिमा वेद गाकर बखान कर रहे हैं, जो सारे इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है ।
इस पद में श्री नारायण स्वामी जी ने श्री युगल सरकार के अत्यंत मनोहर रूप का वर्णन किया है । वह कहते हैं कि, अरे मन तू श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जिनके गोल गाल हैं, होंठ मीठे फल के जैसे एवं नयन अत्यंत विशाल हैं ।
अरे मन तू श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जिनके गोल गाल हैं, होंठ मीठे फल के जैसे एवं नयन अत्यंत विशाल हैं।
अरे मन, युगल सरकार के कमल चरणों से प्रेम करो। तुम अनंत काल से अज्ञानता में सो रहे हो। हे मूर्ख, यह जागने का समय है। जो तेरी भक्ति के पक्ष में एवं उसमें बाधा पहुँचाने वाले हैं, उनसे किसी भी तरह दूर भाग जा। वृंदावन का आश्रय ले, श्री युगल सरकार का भजन कर और भूल कर भी अन्य जगह मन का लगाव न कर ।