प्यारे ब्रजवल्लभ के दर्शन हमारे - श्री द्वारकेश जी
हमारे मन के लिए प्यारे ब्रजवल्लभ के दर्शन ही महान सुखस्वरूप और सदा शांति के धाम हैं।
श्री द्वारकेश जी का जन्म सन् 1650 ई. में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री रघुनाथ जी था। वह पुष्टि मार्ग के अनुयायी थे।
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हमारे मन के लिए प्यारे ब्रजवल्लभ के दर्शन ही महान सुखस्वरूप और सदा शांति के धाम हैं।
श्री श्यामा (राधा) नित्य नवीन, अनुपम नागरी हैं, जो रूप और गुणों की खान हैं। वे अत्यन्त सुभग, ललित और राजराजेश्वरी स्वरूपा हैं ।
हे सखी! सुनो हम केवल ब्रज में ही सदा वास करेंगें । वहाँ अपने हृदय की पीड़ा को कुंजों के हर पत्ते एवं हर लता से कहेंगें।
जहाँ का वास अति सुन्दर और पावन है, ऐसे बरसाना धाम की शरण में वास करो, जहाँ वृषभानु नंदिनी श्री राधा विराजमान हैं, जिन्हें रसिक कुंवरि के नाम से जगत में जाना जाता है।
हम अपने प्रिय प्रभु के प्रति समर्पित हैं। निर्भय होकर, हम उनके कमल चरणों की छाया में वास करते हैं, अन्य सब से उदासीन रहते हैं।
ब्रज की ठकुराइन, अर्थात ब्रज की अधिष्ठात्री, श्री श्यामा हैं, जिनके चरण-कमलों की रज की सेवा के लिए लक्ष्मी जी भी याचना करती हैं।
हे सखी, मुझे ब्रज की सुधि (याद) आ रही है जहां गोवर्धन में स्थित तलहटी की दिव्य रज विद्यमान है जिसके निकट हरि के सर्वश्रेष्ठ दास, सदा निवास करते हैं ।
प्रेम का मार्ग बहुत निराला है । न दिन में चैन आता है न रात को निद्रा, जब प्रियतम ह्रदय में बसता है ।
श्री राधा ब्रज की महारानी हैं, जो ललितकिशोर श्री श्यामसुंदर के रसपीपासू चित्त को सदा सुख प्रदान करने वाली हैं ।
श्री राधा भाद्रपद माह के अनुराधा नामक नक्षत्र में रावल में उज्ज्वल आठवें दिन प्रकट हुई हैं। वह साक्षात प्रेम एवं सौंदर्य का अवतार हैं ।