श्री गोविंद शरण देवाचार्य जी की वाणी

श्री गोविंद शरण देवाचार्य जी की वाणी, श्री गोविंद शरण देवाचार्य जी द्वारा लिखित दोहों एवं पदों का संग्रह है, जो वृंदावन धाम के एक निम्बार्क अनुयायी रसिक संत हैं। रचयिता: श्री गोविंद शरण देवाचार्य

9 लेख उपलब्ध हैं

  1. नमो कृष्ण जै नित्य विहारी - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (3)

    नित्य निकुंज में विहार करने वाले श्री कृष्ण को नमस्कार है। वे अपनी प्राणप्रिया श्री राधा जी के साथ नित्य-नवीन केलि-विलास करते हुए सर्वदा जययुक्त (सुशोभित) हैं।

  2. आज खेलें होरी नव नागरी - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (151)

    आज परम नागरी, श्री राधा महारानी होली खेल रही हैं। वे समस्त कलाओं और गुणों की खान हैं, और अपने प्रियतम श्री कृष्ण पर अत्यंत प्रेमपूर्वक गुलाल डाल रही हैं।

  3. नीके बिहारी- बिहारिनि प्यारे - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (106)

    कुंजमहल में विराजमान प्रेम रंग में भींजे श्री श्यामाश्याम बड़े प्यारे लग रहे हैं, जो सखियों के आँखों के तारे हैं ।

  4. अहो बृषभानुजे किसोरी श्रीबनवास दै बसावौ - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (110)

    हे वृषभानु नंदिनी, मुझे श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये । मधुर स्वर में 'यह मेरा है', ऐसा कहकर मेरे ह्रदय में आनंद का संचार कीजिये ।

  5. हमारैं साहिबनी वन रानी - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (96)

    हमारी साहिबिनी (स्वामिनी) वृंदावन की महारानी श्री राधिका रानी है । जिस नंदनंदन [श्री कृष्ण] का यश वेद पुराण इत्यादि गाते हैं वह उनको भी सुख का दान करने वाली हैं ।

  6. बनी है नीकी राधा माधव जोरी - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (75)

    श्री राधा माधव की यह दिव्य गौर श्याम वर्ण जोड़ी कितनी नीकी [सुंदर] बनी है जिनके तन पर नील पीट वस्त्र सुशोभित है जिसकी शोभा को देखकर कोटि कोटि रति कामदेव को नयौछावर किया जा सकता है ।

  7. कुल रूप उज़ारी मेरी स्वामिनी - श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (25)

    मेरी स्वामिनी समस्त रूप की उजियारी हैं । इनका कंचन [सोने] के समान तन है, नीलांबर वस्त्र अलंकृत हैं, एवं समस्त गुणों की निधि मेरी स्वामिनी हैं जिनका नाम राधा है ।