होरी आईरी रंग रंगीली - श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
रंगों से भरी, छबीली और मन को प्रिय लगने वाली होली आ गई है। नव पल्लव और पुष्पों से खिले वृंदावन में भौंरों की गूँज अत्यंत सुखद लग रही है।
श्री किशोरी दास, गौड़ीय सम्प्रदाय के एक रसिक भक्त हुए हैं ।
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रंगों से भरी, छबीली और मन को प्रिय लगने वाली होली आ गई है। नव पल्लव और पुष्पों से खिले वृंदावन में भौंरों की गूँज अत्यंत सुखद लग रही है।
आज ललित त्रिभंगी लाल श्री कृष्ण श्री राधा को झूला झुला रहे हैं । श्री राधा के अंग स्वाभाविक श्रृंगार से केसरी रंग से रंगे चमक रहे हैं, और देह पर पंचरंगी साड़ी सजी है। [1]
आज श्री राधा जू सहज रूप से अति सुंदर दिख रही हैं। अपने संग मोहन श्री कृष्ण को लिए नृत्य कर रही हैं, गा रही हैं एवं वंशी बजा रही हैं, जिसका आनंद ह्रदय में समा नहीं रहा है।
अरे ब्रज के लोगों, देखो, नवल रसिया श्री कृष्ण डफ लिए वृन्दावन की वीथियों में गाते हुए विचरण कर रहा है, और ताली दे-दे कर हँस रहा है।
आज, श्री राधा प्यारी जू का झूला बहुत सुंदर ढंग से शोभायमान है। उनका रंगीन लहंगा और चुनरी कंचुकी की सुंदरता अद्वितीय है।
युगल किशोर श्री राधा कृष्ण होली खेल रहे हैं। उनकी सुन्दर शोभा को देखते ही बनता है, जो नित्य नविन रंगों की वर्षा कर रहे हैं।
श्री गिरिराज गोवर्धन पर युगल सरकार श्री राधा कृष्ण सुंदर कदंब वृक्ष के नीचे खड़े हैं । वे रस में ऐसे भीजें हुए हैं मानो घन (मेघ) एवं दामिनी (बिजली) एक दूसरे को आलिंगित किए हुए हो ।
श्री राधा प्यारी प्रकट हुई हैं, जो रूप की राशि हैं जिनके प्रत्येक अंगों की माधुरी परम अद्भुत है जिसका वर्णन करना असंभव है ।
हे मेरे रूप के उज्जवल, प्यारे श्यामा श्याम! अब तो कृपा कर मुझे दर्शन दीजिए ।
रासेश्वरी श्री राधा की जय हो, जिनका ह्रदय वंशी ध्वनि के श्रवण से ही प्रेम-रंग में परम हुल्लसित हो उठता है ।
श्री राधा कृष्ण श्री वृन्दावन के अति सघन वन में विराजित है । श्री यमुना जी के तीर पर हरे-भरे इस वन में युगल किशोर की शोभा सर्वोपरि है ।
मेरी लाड़िली राधा उन्मत्त होकर झूला झूल रही है । वृक्ष-बेली से सुशोभित सुंदर रँग के हिंडोले में अलबेली सरकार राधा प्यारी झूल रही है ।
मैं योग, जप, तीर्थ, व्रत, संयम इत्यादि की साधना एक क्षण के लिए भी नहीं करता; मैं तो केवल श्री राधा के चरणों की अनन्य उपासना करता हूँ, जिनकी कृपा से श्री वृंदावन का दुर्लभ वास भी सुलभ हो जाता है।
आज श्री कुंज बिहारी लाल झूला झूल रहे हैं । ऐसा अद्बुत रत्नों से जटित वह झूला बना है जो बहुत विशाल है एवं अत्यंत ही सुख प्रदान करने वाल है ।
जब से श्री राधा नाम का श्रवण किया है तब से आनंद हृदय में किसी भी प्रकार समाता नहीं और बाहर उछल आता है।
अद्बुत “श्री राधे” नाम मुझे अति ही सुहाता है । "श्री राधे" नाम नित्य ही भगवान श्री हरि, शंकर एवं ब्रह्मा जी द्वारा रटन किया जाता है एवं वेद पुराण भी इसी नाम का गुणगान करते हैं ।