आज खेलें होरी नव नागरी - श्री गोविंद शरण देवाचार्य, श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी (151)
आज परम नागरी, श्री राधा महारानी होली खेल रही हैं। वे समस्त कलाओं और गुणों की खान हैं, और अपने प्रियतम श्री कृष्ण पर अत्यंत प्रेमपूर्वक गुलाल डाल रही हैं।
राग पराज पूर्वी थाट से संबंधित है। राग पराज रात 10 बजे से 1 बजे के बीच गाया जाता है।
10 संकीर्तन उपलब्ध हैं
आज परम नागरी, श्री राधा महारानी होली खेल रही हैं। वे समस्त कलाओं और गुणों की खान हैं, और अपने प्रियतम श्री कृष्ण पर अत्यंत प्रेमपूर्वक गुलाल डाल रही हैं।
हे वृषभानु-दुलारी श्रीराधा! मुझे तो एकमात्र आपका ही बल है। यद्यपि मैं गुणहीन और पतित हूँ, फिर भी मैं आपकी ही शरण में हूँ।
मुझसे अधिक कुटिल और अविचारी कौन होगा? जिसकी जिह्वा अमृतमय नाम का त्याग करके, दिन-रात व्यर्थ की बातें करती रहती है।
हे मेरी स्वामिनी (श्री राधा), हे गजगामिनी (मस्त हाथी के समान चाल वाली), हे मन को मोहित करने वाली, श्री राधे! प्रियतम रसिक लाल श्री कृष्ण केवल आपके ही हैं और आपके वचनों को ही मानते हैं।
हे मेरी प्राण-प्यारी श्री विहारिणी जू (श्री राधा)! कृपा कर मेरे अवगुणों पर विचार न कीजिए।
हे वृषभानु नंदिनी श्री राधा, हे अतुल-प्रेम-रस-सुधा निधान, मैं तो वन-वन भटकता हुआ गाय चराता हूँ, मैं प्रेम-विधान क्या जानूँ ?
हे मन, तू निरंतर ‘राधा राधा’ जप ले। जब तू हृदय से राधा सुधा रस पियेगा (यह मानकर कि राधा नाम में राधा रानी साक्षात बैठीं हैं) तो यही नाम तुझे लीला का दर्शन करवा देगा। तू श्री प्रियाजी (राधा रानी) के चरणों में विश्वास तो रख।
हे प्राणप्यारी किशोरीजी आप मुझे कब श्री वृंदावन में बसाओगी? हे श्री राधे, कब आप रसिक शिरोमणि श्री श्याम सुंदर संग मुझे माधुरी तान सुनाओगी?
नवल निकुंज में नवल जोरी श्री जुगल किशोर विराज रहे हैं। श्री श्यामसुंदर के अंग-प्रत्यंग रस से भरे प्रतीत हो रहे हैं एवं नवल किशोरी श्री श्यामा जू की अंग कांति विद्युत वर्ण है।
श्री ललित किशोरीजी श्री वृन्दावन विहारिणी अर्थात जो वृन्दावन में नित्य विहार करती हैं (श्री राधारानी) और जो दीन जनों से बिना कारण ही स्नेह करती हैं, से प्रार्थना कर रहे हैं कि हे किशोरीजी मेरे अपराधों को आप मत देखिये, और अपनी दासी मान कर अपनी कृपा दृष्टि डालिये। वृन्दावन के किसी कुञ्ज कुटीर के कोने में मुझे भी निवास दीजिये। हे करुणा सिंधु अगाधे राधे, अब मेरी बिगड़ी को संवार दीजिए।