ब्रज रस माधुरी भाग 1 [श्री कृपालुजी]

ब्रज रस माधुरी जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की काव्य रचना है जो ब्रज रस की माधुरी को प्रकट करती है । रचना में विभिन्न दोहे हैं। इसे तीन भागों में बांटा गया है। लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज

12 लेख उपलब्ध हैं

  1. जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी (1.91)

    जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन, रसिक मुकुट मणि जय गोपीजन । राधे राधे रटें श्याम, राधे रटे श्याम श्याम, राधे श्याम युगल नाम, मेरो है जीवन ।।

  2. राधा मेरी गति मति - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (75)

    श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है। मेरा प्रेम केवल श्री राधा रानी के चरण कमलों तक ही सीमित है।श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है, और मैं उन पर करोड़ों करोड़ों कामदेवों को न्योछावर करता हूं।

  3. मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (67)

    मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे, वो तो भाजो चलो आवे रोतो वंशी वट पे। मैं तो बावरी ह्वै नाचूँगी कालिंदी तट पै, मैं तो वारी वारी जाऊँ प्यारी जू के नीले पट पै ।

  4. मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (57)

    मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण। राधे रानी के चरण, नव पल्लव बरन। राधे रानी के चरण, जीवन रसिकन। राधे रानी के चरण, सोइ मेरो प्राणधन।

  5. नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (97)

    नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! बढ़ें भक्ति निष्काम नित मेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! तोहिं पतित जनन ही प्यारे हैं, हम अगनित पापन वारे हैं! पुनि कत कर एतिक बेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं!

  6. मम प्यारी वृषभानु दुलारी - जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (94)

    मेरी प्यारी राधा राजा वृषभानु की बेटी हैं और मेरे प्यारे कृष्ण नंद के बेटे हैं। मेरी प्यारी राधा बरसाना से हैं और प्यारी के जो प्यारे हैं वो गिरधारी हैं।

  7. मनु करू सिमरन - श्री जगद्गुरु कृपालुजी महाराज, ब्रज रस माधुरी भाग 1 (57)

    हे मेरे मन ! श्री राधारानी के चरण कमलों का ध्यान कर। उन चरणों की सेवा श्री कृष्ण द्वारा की जाती हैं और वे स्वयं उनके चरण कमलों का ध्यान करते हैं।