जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी (1.91)
जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन, रसिक मुकुट मणि जय गोपीजन । राधे राधे रटें श्याम, राधे रटे श्याम श्याम, राधे श्याम युगल नाम, मेरो है जीवन ।।
ब्रज रस माधुरी जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की काव्य रचना है जो ब्रज रस की माधुरी को प्रकट करती है । रचना में विभिन्न दोहे हैं। इसे तीन भागों में बांटा गया है। लेखक: जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज
12 लेख उपलब्ध हैं
जय राधे जय कृष्ण जय वृंदावन, रसिक मुकुट मणि जय गोपीजन । राधे राधे रटें श्याम, राधे रटे श्याम श्याम, राधे श्याम युगल नाम, मेरो है जीवन ।।
O Radhe! Bestow Your grace upon me now. O Radhe! I have taken eventual refuge at Your Door. O Radhe! I am burning in the fire of three fold material suffering.
मन करू सुमिरन राधा रानी के चरन । राधा रानी के चरन, नव पल्लव बरन । राधा रानी के चरन, जीवन रसिकन ।
श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है। मेरा प्रेम केवल श्री राधा रानी के चरण कमलों तक ही सीमित है।श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है, और मैं उन पर करोड़ों करोड़ों कामदेवों को न्योछावर करता हूं।
मैं तो राधे राधे गाऊँ कालिंदी तट पे, वो तो भाजो चलो आवे रोतो वंशी वट पे। मैं तो बावरी ह्वै नाचूँगी कालिंदी तट पै, मैं तो वारी वारी जाऊँ प्यारी जू के नीले पट पै ।
तो पै वारी वारी बरसाने वारी प्यारी | बरसाने वारी, बरसाने वारी प्यारी || तो पै वारी वारी वारी बनवारी प्यारी |
मन करु सुमिरन राधे रानी के चरण। राधे रानी के चरण, नव पल्लव बरन। राधे रानी के चरण, जीवन रसिकन। राधे रानी के चरण, सोइ मेरो प्राणधन।
नित सेवा मांगूँ श्यामा श्याम तेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! बढ़ें भक्ति निष्काम नित मेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं! तोहिं पतित जनन ही प्यारे हैं, हम अगनित पापन वारे हैं! पुनि कत कर एतिक बेरी, न भुक्ति नाहीं मुक्ति मांगूँ मैं!
मेरी प्यारी राधा राजा वृषभानु की बेटी हैं और मेरे प्यारे कृष्ण नंद के बेटे हैं। मेरी प्यारी राधा बरसाना से हैं और प्यारी के जो प्यारे हैं वो गिरधारी हैं।
श्री राधा कृष्ण हैं और कृष्ण राधा हैं। श्री राधा के बिना ही श्रीकृष्ण की पूजा करना अपराध है।
हे मेरे मन ! श्री राधारानी के चरण कमलों का ध्यान कर। उन चरणों की सेवा श्री कृष्ण द्वारा की जाती हैं और वे स्वयं उनके चरण कमलों का ध्यान करते हैं।
मेरी धन संपत्ति एकमात्र श्री राधा हैं। मेरी प्राण धन एकमात्र श्री राधा हैं।