श्री ललित विहारिणि

श्री ललित विहारिणि जी वृंदावन धाम के एक रसिक संत थे।

17 लेख उपलब्ध हैं

  1. एती कृपा स्वामिनि मन चाहै - श्री ललित विहारिणी जी

    हे स्वामिनीजू (श्री राधा), मुझ पर इतनी कृपा कर दीजिए कि मेरे मन से समस्त विकार, जैसे परनिंदा, अभिमान, ईर्ष्या और भेद-भाव सदा के लिए समाप्त हो जाएं।

  2. रे घनश्याम बिना रस रीते - श्री ललित विहारिणी जी

    हे घनश्याम, तुम्हारे बिना मैं रसहीन हो गई हूँ। यह प्रिय सावन ऋतु का आगमन हुआ है, परंतु तुम्हारे बिना इसे बिताना कठिन हो रहा है। तुमसे प्रेम करके मैं बहुत पछता रही हूँ और सबके सामने निन्दित हो चुकी हूँ।

  3. श्रीराधा रूप-लावण्य की वन्या - श्री ललित विहारिणी जी

    श्री राधा रूप एवं सौंदर्य की सदा प्रवाहित होने वाली नदी के समान हैं। वे सुंदर, सुकोमल, स्वर्ण के समान कांति वाली गोरी हैं जो श्री कृष्ण की प्रियतमा तथा कीर्ति जी की पुत्री हैं। [1]

  4. मोहि किन दैव कियो ब्रजवासी - श्री ललित विहारिणी जी

    हे विधाता, तुम्हारी कृपा से मुझे ब्रजवासी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जिसके परिणाम स्वरूप मुझे श्री राधा कृष्ण के चरणों की परम पावन रज को सदा स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है जिसकी याचना सुर, सिद्ध, मुनि एवं महालक्ष्मी आदि भी करते हैं ।

  5. श्याम दृगन की चोट सहे को - श्री ललित विहारिणी जी

    जो जीव श्यामसुंदर के नयनों के कटाक्षों से घायल होता है, उसका हाल केवल उसका ह्रदय ही जानता है । उसकी दशा ऐसी होती है कि वह जीव किसी अन्य से अपने ह्रदय का हाल भी नहीं बता सकता (अर्थात् ऐसे गुप्त प्रेम को वह किसी के सामने प्रकट नहीं कर सकता) ।

  6. देर करो जनि नैक उबारो - श्री ललित विहारिणी जी

    हे श्री श्यामा श्याम, अब देर न कीजिये, मुझे उबार लीजिये । बहिर्मुख होने के कारण मैं भवसागर में गोते खा रहा हूँ, केवल आपके ही सहारे से मैं इससे निकल पाउँगा ।

  7. जब जब वृन्दावन सुधि आवत - श्री ललित विहारिणि जी

    जब भी मेरा मन वृंदावन का स्मरण करता है तो मेरे हृदय के आकाश में वियोग की वेदना उत्पन्न हो जाती है और मेरी आंखों से अश्रुधार प्रवाहित होने लगते हैं ।

  8. मम हिये आय बसहु प्रिय जोरी - श्री ललित विहारिणी जी

    श्री ललित विहरिणि जी युगल से प्रार्थना कर कहते हैं कि हे रसिक शिरोमणि श्री श्याम सुंदर एवं रास रासेश्वरी भानु नंदिनी श्री राधिका जी ऐसी कृपा करो कि आप दोनों की सुंदर जोड़ी मेरे हृदय में भी बस जावे ।

  9. प्रेम सदन की कठिन गली री - श्री ललित विहारिणि

    जिस गली में प्रेम सदन है, उस गली में चलना अत्यंत कठिन है । या तो इस मार्ग को ब्रज चंद्र साँवरे लाल श्री कृष्ण जानते हैं या फिर सर्वोपरि नित्य बिहारिनि वृषभानु नंदिनी श्री राधिका जु जानती हैं । [1]