श्री ठाकुरदास
श्री ठाकुरदास हरिदासी संप्रदाय के वृंदावन के एक रसिक भक्त हैं ।
10 लेख उपलब्ध हैं
ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (4)
श्रीधाम वृन्दावन के ललित-मोहिनी (रसमय) कुंज में श्री प्रिया-प्रियतम का अद्भुत स्वरूप विराजमान है। उन कुंजों में श्री ठाकुरदास जी रसों के सम्राट श्रीस्वामी (स्वामी हरिदास जी) द्वारा निरूपित नित्य-विहार-रस का अनन्य भाव से भजन करते हैं।
आज सखि वन की सोभा देखि - श्री ठाकुर दास जी
एक सखी दूसरी सखी से कहती है—"हे सखि! आज श्री वृन्दावन के वन की अनुपम शोभा तो देखो! श्री यमुना जी के पावन जल में निर्मल कमल के फूल अत्यंत खिले हुए हैं, जिनकी छटा देखते ही बनती है।"
देत दीन कूँ दान नित सदा वृन्दावन वास - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (2)
जो दीन को सहज ही श्री धाम वृन्दावन का वास प्रदान करते हैं, ऐसे स्वामी श्री हरिदास जी महाराज का भजन कर अपने मन को सदा उस परम शीतल, सुखद श्यामा कुंजबिहारी के नित्य-विहार-रस में ही लगाना चाहिए ।
ललित मोहिनी कुंज में दई पुंज दरसाय - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (3)
श्री ललित मोहिनी कुंज में प्रिया-प्रियतम के रस-सौंदर्य के अपार पुंज का दर्शन उनकी कृपा से ही संभव हुआ है । ठाकुरदास कहते हैं — वहाँ सहचरियाँ प्रेमरस में पूर्णतः उन्मत्त होकर, श्री श्यामा कुंजबिहारी की निष्काम सेवा में सदा तत्पर रहती हैं।
मेरौ लाल स्यामा रंग भीनौं - श्री ठाकुर दास जी
हे श्यामा जू (श्री राधा)! मेरा लाल (श्री कृष्ण) तो आपके ही रंग में रंगा हुआ है। तुम अपने मुख से कुछ बोलती क्यों नहीं, क्या लाल ने कुछ किया है?
ललित मोहिनी कृपा तें निरखत केलि विलास - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (5)
श्री ललित मोहिनी देव जी की कृपा से, मैं युगल सरकार श्री बिहारी-बिहारिनी के अनुपम केली विलास के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूँ। श्रीधाम वृंदावन नित्य नवीन रूप में प्रकट हो रहा है। श्री ठाकुरदास बारंबार अपने आपको बलिहार कर रहे हैं।
प्रिया श्याम रूप रंग माती - श्री ठाकुर दास जी
दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण एक-दूसरे के अद्वितीय सौंदर्य एवं माधुर्य में पूर्णतः निमग्न हैं। उनके अंग-अंग से नित्य नवीन प्रेम की रसधारा प्रवाहित हो रही है, जिसकी अलौकिक शोभा का वर्णन करना असंभव है।
श्री स्वामी हरिदास भजि सब सारनि कौ सार - श्री ठाकुर दास जी
स्वामी श्री हरिदास जी का भजन करो जो समस्त सारों का सार है । श्री ठाकुर दास जी कहते हैं कि श्री ललित मोहिनी देव जी की कृपा से नित्य विहार के इस अमूल्य रस को प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।
बार बार बंदन करौ - श्री ठाकुर दास जी
बारंबार श्री बिहारीजी के दासों को नमन करता हूँ। हे बाँके बिहारीलाल! ठाकुरदास आपकी शरण में है — कृपा कर उसे सदा अपने पावन चरणों के समीप रखें।
ठाकुरदास निज महल में, केलि नई नित होइ - श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (6)
श्री वृंदावन के निज महल में श्री श्यामा-कुंजबिहारी की नित्य नई-नई केलि-लीलाएँ होती रहती हैं। वहाँ स्वामी श्री हरिदास जी की कृपा के बिना कोई भी प्रवेश नहीं पा सकता।