15 शब्दकोश लेख उपलब्ध हैं

  1. यत्र वृन्दावने पुण्ये - नारदपुराण, उत्तरार्धः (80.82)

    परम पावन श्रीवृन्दावन-धाम के नर-नारी, वानर, कृमि, कीट-पतंग, खग (पक्षी), मृग (पशु), वृक्ष और पर्वत भी निरन्तर श्रीराधा-कृष्ण नाम का उच्चारण (संकीर्तन) करते रहते हैं ।

  2. श्री गुणमंजरीदास (श्री गल्लू गोस्वामी) जी की जीवनी

    माध्वगौड़ेश्वराचार्य परम सन्त पूज्य पाद गोस्वामी श्री गल्लू जी महाराज के पिता का नाम श्रीरमण दयालजी महाराज था । श्री गल्लू जी महाराज का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी सन् 1827 में हुआ था । इनके एकमात्र पुत्र श्रीराधाचरण गोस्वामी जी हुये । श्रीराधाचरण जी की माँ का नाम श्रीमती सूर्यादेवी गोस्वामी था ।

  3. तदालापं कुरुष्वैव - पद्म पुराण, उत्तर खंड (163.3)

    भगवान शिवजी कहते हैं: हे महाभाग! श्री राधा का भजन करो, उनका मन्त्र (राधा) जो अति उत्तम है उसका जप करो और हर क्षण राधा-राधा बोलते हुए उनका नाम-कीर्तन करो।

  4. श्री ललित किशोरी जी की जीवनी (गौड़ीय संप्रदाय)

    श्री ललित किशोरी जी का जन्म लखनऊ में मिती कार्तिक कृष्णा में द्वितीय दिन सन 1825 में हुआ था। इनके पितामह शाह बिहारीलालजी उस समय लखनऊ में प्रसिद्ध धनाढ्य थे नवाबों से उनको “शाह" उपाधि प्राप्त थी।

  5. श्री लाल बलबीर (बद्रीप्रसादजी) की जीवनी

    वृन्दावन में एक से एक उत्कृष्ट कवि, आचार्य, ज्ञानी, भक्त, रसिक तथा मनीषी हुए हैं ऐसे प्रकृत भक्त कवियों में 'लाल बलवीर' (बद्रीविशाल) का नाम भी उल्लेखनीय है ।

  6. श्री रूपरसिक देवाचार्य जी की जीवनी 

    श्री रूपरसिक देवाचार्य जी का जन्म दक्षिण देश में हुआ था और ये जाति के ब्राह्मण थे। श्री परशुराम देवाचार्य जी के समकालिक होने के कारण श्री रूपरसिक देवाचार्य जी का जन्म 1500 के लगभग अनुमानित होता है।

  7. श्री अनन्यअलि जी की जीवनी 

    श्री अनन्यअलि जी का जन्म अनुमानतः 1683 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका पूर्वनाम भगवानदास था। इनके घर में पहले से ही श्री राधावल्लभीय उपासना चली आ रही थी।

  8. श्री हित गोपालदास जी की जीवनी 

    श्री गोपालदास जी "लघु सखी" राधावल्लभ संप्रदाय में दीक्षित एक परम भक्त थे। इनका जन्म पंजाब में 1940 के आसपास अनुमानित होता है।

  9. श्री ललित माधुरी जी की जीवनी

    श्री ललित माधुरी जी का जन्म 1828 के माघ शु० 14 को लखनऊ में हुआ। इनके पितामह शाह बिहारीलालजी उस समय लखनऊ में प्रसिद्ध धनाढ्य थे। नवाबों से उनको “शाह" उपाधि प्राप्त थी।

  10. भांडीरवन

    भांडीरवन, वह पवित्र भूमि जिसने श्री राधा-कृष्ण को मिलाया है! मथुरा में 137 पवित्र वनों में से एक भांडीरवन, वृंदावन से 10 किमी दूर स्थित है।

  11. श्री भट्ट देवाचार्य जी का जीवन परिचय

    श्री भट्टदेव जी श्रीकेशवकाशमीरी भट्टजीके शिष्य थे । श्रीकेशवकाशमीरी जी के बाद वे निम्बार्क सम्प्रदायके ३४ वें आचार्य हुए। श्री भट्टदेव जी उत्तर भारतके प्रथम व्यक्ति थे, जो निम्बार्क सम्प्रदाय के आचार्य हुए । वे निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रथम वाणीकार थे, जिन्होंने ब्रजभाषा में अपनी रचनाएँ की थी।

  12. उद्धव कुण्ड – कुसुम सरोवर

    कुसुम सरोवर तक का स्थल उद्धव जी का स्थल कहा जाता है । कुसुम सरोवर के इस पार और उस पार दोनों ओर उद्धव जी का मंदिर है । समीप ही है – उद्धव कुण्ड ।