राग ललित

राग ललित हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख राग है। इसे आमतौर पर शांत और भक्ति के रूप में वर्णित किया जाता है और यह दिन के भोर के समय गाया जाता है । इस राग में दोनों मध्यम (तीव्र व शुद्ध मध्यम) एक साथ (म् म ; ग म् म ; नि ध१ म् म) प्रयोग होने के कारण इस राग का एक अलग ही वातावरण तैयार होता है।

11 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. जय जय जमुना सब सुखकारी - श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (141)

    सब प्रकार के सुखों को प्रदान करने वाली श्री यमुना जी की बारंबार जय हो, जय हो। आप भक्तों पर अत्यंत कृपा करने वाली और साक्षात् करुणा की मूर्ति हैं। आप सदा सबका मंगल (कल्याण) करने वाली और समस्त अमंगलों (दुखों व संकटों) को हरने वाली हैं।

  2. आज विराजत आलीरी नवल किसोर - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (19)

    हे सखी! आज नवल किशोर श्री श्यामा श्याम अद्भुत रूप से विराज रहे हैं। भोर में दोनों एक दूसरे को आलिंगन किए हुए, एक दूसरे की भुजाओं में भुजाएं डाले रसरंग में भींजे हुए हैं।

  3. तू तौ मेरे प्राननि हूँ तै प्यारी - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (828)

    श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि हे राधे, तुम तो मुझे प्राणों से भी अधिक प्यारी हो । मैं तो तुम्हारी ही शरण में हूँ, अत: मेरी ओर थोड़ा सा निहार कर हंस कर बोल लीजिए ।

  4. राधा प्यारी! तू रसरंग भरी - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (782)

    हे श्री राधा प्यारी जू, आज आप प्रेम रस के रंग से ओत प्रोत हैं। मैंने जाना है आपने निश्चित ही कोटि कोटि कामदेवों की फ़ौज के गर्व को भंग किया है।

  5. हौं तो प्यारी प्रीतम - श्री चंद्र सखी

    मैं प्रीतम प्यारी की बलिहारी जाती हूं जब दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण श्री वृंदावन धाम में भुजाओं को मिलाए हुए नित्य ही केली करते हैं एवं सुख बरसाते हैं । [1]

  6. कमल सी अखियाँ लाल बिहारी- श्री विट्ठल जी

    हे बाँके बिहारी लाल, आपकी अँखियाँ कमल की भाँति हैं, यह ऐसे तीर चला रही हैं कि हमारा हृदय घायल हो रहा है । परंतु इसमें इनका भी दोष क्या है, यह आज नियंत्रण में ही नहीं हैं ।

  7. हमरो प्रणाम बांके बिहारी को - श्री मीराबाई जी

    इस पद् में श्री मीराबाई जी ने श्री बांके बिहारी जी को प्रणाम एवं उनके मधुर रूप का वर्णन किया है। श्री बांके बिहारी जी के सिर पर मोर मुकुट एवं माथे पर तिलक विराजता है, उन्होंने कुंडल और काली अलकावली धारण कर रखी है ।