राग टोडी

तुषारकुन्दोज्वलादेहयष्टिर्काश्मीरकपूर विलिप्तदेहा। विनोदयंति हरिणं वनांते वीणाधरा राजति तोडिकेयम्॥ - देवर्षि नारद, राग निरूपणम् (74) टोडी कौशिक की पत्नी हैं। बर्फ की तरह सफ़ेद रंग का उनका पतला शरीर है जो कश्मीर के कपूर से अभिषिक्त है। वह हाथों में वीणा पकड़े हुए जंगल के अंत में हिरणों का मनोरंजन कर रही हैं। राग टोडी को सुबह देर से गाया जाता है।

12 संकीर्तन उपलब्ध हैं

  1. तेरे रूप सम औरु नहीं - श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (46)

    तुम्हारी जैसी सुंदरता और कोई नहीं है। तुम्हारे अंग-अंग सुंदरता के सदन हैं। हे सखी, तुम्हारी चपल भौहें ऐसी अनियारी हैं कि तीनों लोक वशीभूत हो जाते हैं और उन पर शासन करती हैं।

  2. बंदौं राधा-पद-रज पावन - श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (10)

    श्री राधा की पावन पद रज का मैं वंदन करता हूँ जो नित्य ही श्री श्यामसुंदर द्वारा सेवित है, परम पुण्यमय है एवं तीन प्रकार के तापों का विनाश करने वाली है ।

  3. श्याम ही सुन्दर श्याम ही अलकें - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी

    श्याम वर्ण वाले श्री कृष्ण अत्यंत ही सुंदर हैं, जिनके श्याम रंग की ही अल्कें एवं बेनी अत्यंत भारी हैं। श्याम रंग की ही भौंहें एवं अखियों में भी श्याम रंग का ही काजल लगा हुआ है।

  4. रसिक शिरमौर ढौरि लगावत गावत राधा राधा नाम - सूरदास

    एक सखी श्री राधा से कहते है कि, हे प्यारी : रसिक सिरमौर श्री कृष्ण वृन्दावन की कुंजों में सोहनी लगाते हुए, वृन्दावन की रज की पूर्ण निष्ठा में श्री "राधा राधा" नाम का जाप कर रहे हैं एवं आपके गुणों का गान करते हैं।

  5. आजु देखि व्रज सुन्दरी मोहन बनी केलि - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री हित चौरासी (17)

    (श्रीहित सजनी कहती हैं-) "सखियों! देखो आज ब्रज सुंदरी श्रीराधा और मोहन की क्रीड़ा (कैसी भली) बनी है। रूप की राशि युगल किशोर परस्पर एक के स्कन्ध पर दूसरे की बाहुलता लपेट कर ऐसे शोभित हैं मानो तमाल (द्रुम) से सरस स्वर्ण बेलि लिपट रही हो।

  6. तुब मुख नैन कमल अली मेरे - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (4.5)

    हे प्यारी, मेरे नयन तो हमेशा तुम्हारे मुख कमल के भ्रमर बने एक पल के लिये भी यदि इन्हें तुम्हारे मुखारविंद के दर्शनों से वंचित रहना पडे तो ये बेचैन हो उठते हैं, अत्यंत अधीर हो जाते है, मैं इन्हें हटाना चाहूँ तो भी नहीं हटते।